केरल की शराब नीति गठबंधन की पार्टियों से बातचीत के बाद तय की जाएगी: मंत्री
केरल की शराब नीति गठबंधन की पार्टियों से बातचीत के बाद तय की जाएगी: मंत्री
तिरुवनंतपुरम, 26 जून (भाषा) केरल के राजस्व मंत्री ए पी अनिल कुमार ने शुक्रवार को कहा कि कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर में कटौती संबंधी कोई भी नीतिगत निर्णय सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा के भीतर और कांग्रेस नेतृत्व के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
कुमार की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राज्य सरकार के वर्ष 2026 के बजट में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कर कम करने के प्रस्ताव को लेकर केरल में विवाद जारी है।
बजट में 0.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक अल्कोहल मात्रा वाले पेय पदार्थों पर 120 प्रतिशत बिक्री कर तथा 10 प्रतिशत से अधिक और 20 प्रतिशत तक अल्कोहल मात्रा वाले पेय पदार्थों पर 175 प्रतिशत बिक्री कर लगाने का प्रस्ताव किया गया है।
प्रस्तावित कर ढांचे की विपक्ष और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आलोचना की है। उनका तर्क है कि कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर कम कर लगाने से शराब की खपत को बढ़ावा मिल सकता है और निजी शराब कंपनियों को लाभ होगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी एम सुधीरन ने भी इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है।
मुख्यमंत्री वी डी सतीशन के पास वित्त विभाग भी है। उन्होंने कहा है कि बजट में केवल कर ढांचे का प्रावधान किया गया है और विपणन या बिक्री को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमार ने कहा कि नीतिगत मामलों पर कोई भी निर्णय एकतरफा नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “यदि यह नीतिगत मामला है, तो इस पर मोर्चे और उसके घटक दलों के भीतर चर्चा की जाएगी। यदि कहीं कोई त्रुटि दिखाई देती है, तो उसे सुधारा जाएगा।”
सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि कोई भी नया निर्णय पहले की तरह एकतरफा नहीं होगा। उन्होंने कहा, “ऐसा कोई भी फैसला संबंधित पक्षों और गठबंधन नेतृत्व के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।”
कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं विधानसभा में यह बात कह चुके हैं और सभी ने इसे सुना है। उन्होंने कहा, “यदि कोई रुख अपनाना होगा, तो उसका फैसला पार्टी नेतृत्व और गठबंधन के साथ विचार-विमर्श के बाद ही किया जाएगा।”
इस बीच, थलासेरी के आर्चबिशप जोसेफ पाम्पलानी ने इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने से पहले विस्तृत चर्चा कराने के मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत किया। आर्चबिशप ने संवाददाताओं से कहा, “केरल के सम्मानित मुख्यमंत्री द्वारा विस्तृत चर्चा के लिए समय निकालने का निर्णय अत्यंत सराहनीय है। इस रुख के लिए हम मुख्यमंत्री के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हैं।”
राज्य सरकार का कहना है कि बजट में किया गया प्रावधान केवल कराधान से संबंधित है और किसी भी व्यापक नीतिगत निर्णय पर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर विचार-विमर्श के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
समस्त केरल जमीयतुल उलेमा अध्यक्ष जिफरी मुथुकोया थंगल ने कहा कि इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार मुसलमान शराब का सेवन नहीं करते। उन्होंने कहा कि हालांकि, उनकी संस्था मदिरापान का विरोध करती है, लेकिन सरकारें परंपरागत रूप से किसी एक समुदाय के विचारों से इतर अपनी आबकारी नीतियां बनाती रही हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “यह कोई नया मुद्दा नहीं है। अतीत में भी शराब से संबंधित नीतियां रही हैं।”
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन ने कहा कि सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य पूर्ण शराबबंदी है, लेकिन इसके सफल होने से पहले सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के समन्वित प्रयासों से उपयुक्त सामाजिक वातावरण तैयार करना आवश्यक है। भाषा अमित रंजन
रंजन

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