खरगे ने पश्चिम एशिया संघर्ष, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर राज्यसभा में चर्चा कराने की मांग की
खरगे ने पश्चिम एशिया संघर्ष, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर राज्यसभा में चर्चा कराने की मांग की
(तस्वीर सहित)
नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम एशिया में संघर्ष और इसकी वजह से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर सोमवार को उच्च सदन में संक्षिप्त चर्चा कराने की मांग की।
सदन की बैठक में खरगे ने घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) के दामों में 60 रुपये प्रति सिलेंडर और वाणिज्यिक गैस की दरों में 115 रुपये की बढ़ोतरी का हवाला देते हुए नियम 176 के तहत दिए गए अपने नोटिस का औचित्य बताया। उन्होंने कहा कि गैस की कीमतों में वृद्धि से गरीबों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है और इसलिए इस महत्वपूर्ण विषय पर संक्षिप्त चर्चा की अनुमति दी जाए।
उच्च सदन के अध्यक्ष सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि वह नोटिस पर उचित विचार के बाद निर्णय देंगे।
खरगे ने कहा कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलती भू-राजनीतिक स्थिति अब केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है और इसका प्रभाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष भारत की छवि और प्रतिष्ठा पर भी असर डाल रहा है, क्योंकि देश कच्चे तेल की अपनी जरूरत का लगभग 55 प्रतिशत इस क्षेत्र से आयात करता है।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय काम कर रहे हैं और कुछ भारतीयों के मारे जाने या लापता होने की खबरें भी आई हैं।
खरगे के अपनी बात रखने के बाद, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर सदन में अपनी ओर से एक बयान दिया। इस पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्यों ने विरोध जताया। उन्होंने मांग की कि बयान से पहले सदन में इस मुद्दे पर संक्षिप्त चर्चा होनी चाहिए।
विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, जयशंकर ने अपना बयान पूरा किया। बयान खत्म होने से पहले, विपक्षी सदस्य चर्चा की मांग पूरी न होने पर विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।
भाषा मनीषा सुभाष
सुभाष

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