खरगे आतंकवाद और उससे लड़ने वालों के बीच अंतर करने में विफल रहे हैं : राधाकृष्णन

खरगे आतंकवाद और उससे लड़ने वालों के बीच अंतर करने में विफल रहे हैं : राधाकृष्णन

खरगे आतंकवाद और उससे लड़ने वालों के बीच अंतर करने में विफल रहे हैं : राधाकृष्णन
Modified Date: April 22, 2026 / 04:04 pm IST
Published Date: April 22, 2026 4:04 pm IST

बीदर (कर्नाटक), 22 अप्रैल (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता ‘‘आतंकवाद और उससे लड़ने वालों के बीच अंतर करने में विफल रहे हैं।’’

राधाकृष्णन ने बीदर जिले में श्री चन्नबासव आश्रम में हिरेमठ संस्थान के डॉ. बासवलिंग पट्टादेवरु महास्वामीजी के अमृत महोत्सव (75वीं जयंती) समारोह में अपने संबोधन की शुरुआत में यह टिप्पणी की।

इस कार्यक्रम में खरगे, राज्यपाल थावरचंद गहलोत और मंत्री ईश्वर खंड्रे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘खरगे जी से मेरा थोड़ा सा मतभेद था – सिर्फ नजरिये का। कभी-कभी मुझे लगता है कि खरगे जी काले और सफेद में, या आतंकवादी और आतंकवादी के लिए भय पैदा करने वाले में फर्क नहीं कर पाते। इसके अलावा मुझे कोई समस्या नहीं है, वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।’’

खरगे ने मंगलवार को मोदी पर सरकारी तंत्र और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष को दबाने व राजनीतिक दलों को “आतंकित” करने का आरोप लगाया था, जिस पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

खरगे ने चेन्नई में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया था। उनहोंने इस दौरान भाजपा के साथ ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के गठबंधन की आलोचना करते हुए मोदी को ‘‘आतंकवादी’’ कहा।

पेरियार और सी.एन. अन्नादुरई की द्रविड़ विचारधाराओं में रची-बसी अन्नाद्रमुक का भाजपा के साथ गठबंधन पर सवाल उठाते हुए खरगे ने कहा, ‘‘ये अन्नाद्रमुक के लोग, जिन्होंने खुद अन्नादुरई की तस्वीर लगाई है… वे मोदी के साथ कैसे जुड़ सकते हैं? वह (मोदी) एक आतंकवादी हैं। वह समानता में विश्वास नहीं करते। उनकी पार्टी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती। और ये लोग (अन्नाद्रमुक) उनके साथ जुड़ रहे हैं, जिसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।’’

भाषा

शफीक अविनाश

अविनाश


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