लखीमपुर खीरी हिंसा: न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट तलब
लखीमपुर खीरी हिंसा: न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट तलब
नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारी के आचरण पर रिपोर्ट मांगी, जिन पर आरोप है कि उन्होंने कई स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़े मामलों को अपने पास स्थानांतरित किया और आरोपियों को बरी कर दिया।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वह आरोपों पर गौर करने और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने के बाद अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करें।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के एक प्रत्यक्षदर्शी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल के बीमारी के कारण अदालत में पेश नहीं हो पाने के बाद न्यायिक अधिकारी ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।
भूषण ने कहा, ‘‘न्यायिक अधिकारी का आचरण अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है। न्यायिक अधिकारी ने एनडीपीएस और एससी-एसटी के मामलों को अपने पास स्थानांतरित करा लिया और आरोपियों को जमानत दे दी या उन्हें बरी कर दिया। कानून के तहत वह इन मामलों को अपने पास स्थानांतरित नहीं कर सकते।’’
उन्होंने दावा किया कि मामले की सुनवाई के बीच में ही सरकारी अभियोजक को भी बदल दिया गया और नए अभियोजक के पास केवल चार महीने का अनुभव है।
पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह ऐसे वरिष्ठतम सरकारी अभियोजक की तलाश करे, जिसे मामले में सत्र अदालत में मुकदमे की कार्यवाही का पर्याप्त अनुभव हो और दो सप्ताह के भीतर न्यायालय को इसकी जानकारी दे।
उच्चतम न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।
छह अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत की शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया था।
तीन अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके के दौरे के विरोध में किसानों के प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी।
चार किसानों को एक एसयूवी ने कथित तौर पर कुचल दिया था। इसके बाद आक्रोशित किसानों ने एक चालक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हुई थी।
दिसंबर 2023 में निचली अदालत ने मिश्रा और 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इनमें हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के आरोप शामिल थे। इसके साथ ही मुख्य मामले में मुकदमे की शुरुआत का रास्ता साफ हो गया था।
भाषा गोला अमित
अमित

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