रांची, 20 अगस्त (भाषा) झारखंड में वाम दलों ने खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में 25 अगस्त से सप्ताहभर आंदोलन शुरू करने की बृहस्पतिवार को घोषणा की।
यह घोषणा यहां वाम दलों के नेताओं ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में की। इसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ़ इंडिया (एसयूसीआई) और फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रतिनिधि शामिल थे।
भाकपा के राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आंदोलन के तहत 25 से 31 अगस्त तक राज्य के हर गांव, प्रखंड और जिले में कानून की प्रतियां जलाई जाएंगी। साथ ही लोगों को जागरूक किया जाएगा कि यह कदम किस तरह राज्य के सभी विकास कार्यों को रोक देगा।’’
राज्यसभा ने इससे संबंधित विधेयक को 13 अगस्त और लोकसभा ने 12 अगस्त को मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 17 अगस्त को इस विधेयक को अपनी संतुति दी, जिसके बाद यह अधिनियम के रूप में अस्तित्व में आ गया।
इस अधिनियम में राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से रोकने का प्रावधान किया गया है।
पाठक ने कहा कि यह कानून झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्यों को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाएगा और राज्य के विकास कार्यों तथा ‘मंईयां सम्मान योजना’, वृद्धावस्था पेंशन समेत अन्य कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावित करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर केंद्र सरकार कानून वापस नहीं लेती है तो हम आर्थिक नाकेबंदी, झारखंड बंद और सड़क जाम जैसे कदम उठाएंगे। यहां से होने वाली उनकी सभी आपूर्तियां, रेल के जरिये भेजी जाने वाली खेपें भी रोक दी जाएंगी। अगर यहां से कोयले की आपूर्ति सिर्फ एक सप्ताह के लिए रोक दी जाए, तो संसद की बत्तियां भी बुझ जाएंगी।’’
भाषा
शुभम खारी
खारी