पुस्तकालय राष्ट्र के लिए बहुमूल्य नागरिक तैयार करने में निभा सकते हैं बड़ी भूमिका: अमित शाह
पुस्तकालय राष्ट्र के लिए बहुमूल्य नागरिक तैयार करने में निभा सकते हैं बड़ी भूमिका: अमित शाह
गांधीनगर, 12 अगस्त (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि बचपन से वयस्क होने तक व्यक्ति के जीवन के परिवर्तनकारी सफर में पुस्तकालय देश के लिए एक मूल्यवान नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप जारी करने के बाद शाह ने ‘डिजिटल माध्यम’ से संबोधित करते हुए अपने जीवन को बदलने में पुस्तकालयों की भूमिका को याद किया।
यह ऐप उनके गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में पुस्तकालयों को आपस में जोड़ता है, जिससे ग्रामीण बच्चों को लाखों किताबें उपलब्ध हो सकेंगी।
गृहमंत्री ने माता-पिता से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने खासकर गृहणियों से कहा कि वे अपने खाली समय का सदुपयोग विभिन्न विषयों के बारे में जानने और अपने बच्चों को पढ़ने की ओर प्रेरित करने में करें।
इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद थे।
शाह ने कहा, ‘‘बिना पढ़े किसी भी विषय में महारत हासिल करना या उसकी बुनियादी जानकारी पाना भी मुमकिन नहीं है। बचपन से किशोरावस्था, युवावस्था और अंत में बड़े होने तक के बदलावकारी सफर में, अगर किसी को पढ़ने की सामग्री और ज्ञान के अलग-अलग पहलुओं के बारे में सही मार्गदर्शन मिले, तो पुस्तकालय सचमुच देश को एक बहुमूल्य नागरिक दे सकते हैं तथा फिर किसी और चीज की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।’’
शाह ने कहा कि पुस्तकाल; ने उन्हें 16 सालों तक कई विषयों की बुनियादी जानकारी और अनगिनत अन्य विषयों की गहरी समझ हासिल करने में मदद की।
उन्होंने कहा, ‘‘अलग-अलग विषयों के बारे में जानकारी खोजने की जो आदत बचपन में शुरू हुई और आगे चलकर एक समर्पित अभ्यास में बदल गई, उसी ने मुझे आज अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने के काबिल बनाया है।’’
शाह ने कहा कि ‘राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस’ के मौके पर ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप जारी किया गया है और गांधीनगर संसदीय क्षेत्र के गांवों में छोटे पुस्तकालय खोलने का काम चल रहा है।
उन्होंने बताया कि ये पुस्तकालय स्कूलों के पास बनाये जा रहे हैं और ऐसे 63 पुस्तकालय बनाने का काम पहले से ही चल रहा है, जिनमें से हर एक में 400 से 600 किताबें होंगी।
शाह ने कहा कि उन्होंने इन ‘बहु-आयामी पुस्तकालयों’ के लिए किताबें खुद चुनी हैं, ताकि बच्चों में पढ़ने की रुचि पैदा हो सके।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने यह भी पक्का किया है कि गांवों में ही उनके भविष्य के करियर के लिए उपयोगी किताबें उपलब्ध हों, जैसे कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अध्ययन सामग्री, गुजरात और भारत का इतिहास, और आज़ादी की लड़ाई एवं 1857 की क्रांति से जुड़ी किताबें।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि माता-पिता के प्रोत्साहन के बिना बच्चे में पढ़ने की आदत विकसित नहीं हो सकती।
भाषा
राजकुमार गोला
गोला

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