सत्यमेव जयते, उच्चतम न्यायालय का ध्येय वाक्य उपनिषद व महाभारत से जुड़ा: एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक
सत्यमेव जयते, उच्चतम न्यायालय का ध्येय वाक्य उपनिषद व महाभारत से जुड़ा: एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक
नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) कक्षा नौ की सामाजिक विज्ञान की नयी पाठ्यपुस्तक में भारत के कई आधुनिक संस्थानों के ध्येय वाक्यों (मोटो) – जैसे ‘सत्यमेव जयते’ और ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ – को उपनिषदों, महाभारत तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों से जोड़ा गया है।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की यह पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – भाग दो’ नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह महीने बाद मंगलवार को जारी की गई। इस पाठ्यपुस्तक का पहला भाग जून में जारी किया गया था।
इस पुस्तक के ‘शासन और सार्वजनिक नीति’ अध्याय के अनुसार, भारत का राष्ट्रीय ध्येय वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ मुंडक उपनिषद से जुड़ा हुआ है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के ध्येय वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ का स्रोत महाभारत में है।
पाठ्यपुस्तक में कहा गया है, ‘स्वतंत्रता के बाद से ही भारतीय संस्थानों ने शासन के पारंपरिक विचारों और मूल्यों को अपनाना जारी रखा है तथा उन्हें आधुनिक लोकतंत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला है। उदाहरण के लिए, ब्रिटिश काल के ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ इंडिया’ का ध्येय वाक्य ‘हेवन्स लाइट, अवर गाइड’ (स्वर्ग का प्रकाश हमारा मार्गदर्शक है) था, लेकिन आजादी के बाद हमने मुंडक उपनिषद से ‘सत्यमेव जयते’ (सत्य की ही विजय होती है) को अपने राष्ट्रीय ध्येय वाक्य के रूप में अपनाया है।’
पुस्तक के अनुसार, ‘यह सार्वजनिक जीवन में भारतीय नैतिक मूल्यों के सतत महत्व को दर्शाता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय का ध्येय वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जय:’ चुना गया था। यह पंक्ति महाभारत से ली गई है और इसका अर्थ है ‘जहां धर्म (सदाचार व कर्तव्य) है, वहीं विजय है’।’
पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि ये ध्येय वाक्य केवल प्रतीकात्मक या ऊपरी तौर पर नहीं हैं, बल्कि ये ‘हमारे संस्थानों के मूल मूल्यों और आदर्शों को दर्शाते हैं, जिन्हें सुशासन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी के साथ सौंपा गया है।’
भाग-दो की यह पाठ्यपुस्तक स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2023 और नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत कक्षा नौ की संशोधित अध्ययन सामग्री के व्यापक बदलाव का ही एक हिस्सा है।
एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित इस नए पाठ्यक्रम में इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र से जुड़े छह अध्याय शामिल हैं।
भाषा सुमित रंजन नरेश
नरेश

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