प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना समय की मांग है: राष्ट्रपति मुर्मू

Ads

प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना समय की मांग है: राष्ट्रपति मुर्मू

  •  
  • Publish Date - July 8, 2024 / 10:53 PM IST,
    Updated On - July 8, 2024 / 10:53 PM IST

भुवनेश्वर, आठ जुलाई (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना समय की मांग है।

भुवनेश्वर के निकट हरिदमदा गांव में ब्रह्मकुमारी के दिव्य ध्यान केंद्र का उद्घाटन करते हुए मुर्मू ने कहा कि जंगल, पहाड़, नदियां, झीलें, समुद्र, बारिश, हवा – ये सभी जीवों के जीवित रहने के लिए अनिवार्य हैं लेकिन मनुष्य अपने भोग-विलास के लिए प्रकृति का दोहन कर रहा है और ऐसा करके प्रकृति के प्रकोप का शिकार हो रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘मनुष्य को यह याद रखना चाहिए कि प्रकृति में प्रचुरता उसकी जरूरतों के लिए है, उसके लालच के लिए नहीं।’’

भारतीय जीवनशैली के हमेशा प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व पर जोर दिये जाने का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारे दर्शन में धरती को माता और आकाश को पिता कहा गया है। नदी को भी माता की उपाधि दी गई है। जल को जीवन कहा गया है और हम वर्षा को भगवान इंद्र और समुद्र को भगवान वरुण के रूप में पूजते हैं।’’

उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि प्रकृति जड़ नहीं है, उसके भीतर भी चेतना की शक्ति है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और मौसम की अनिश्चितता आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘बाढ़, भूस्खलन, हिमस्खलन, भूकंप, जंगल की आग और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएं अब कभी-कभार होने वाली घटनाएं नहीं रह गई हैं। अब ये लगातार होने वाली घटनाएं बन गई हैं।’’

मुर्मू ने कहा, “हमारे दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव समाज में बड़े बदलाव का मार्ग प्रशस्त करते हैं। हमें प्राकृतिक संसाधनों का न्यूनतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अपनी आदतों को बदलना होगा। अक्सर नल खुले रहने से पीने का पानी बर्बाद हो जाता है। दिन में भी लाइट जलती रहती है। प्लेट में कुछ खाना छोड़ देने की आदत से हम अभी तक मुक्त नहीं हो पाए हैं।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली पर सिर्फ चर्चा करना ही काफी नहीं है, हमें इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने ब्रह्माकुमारी के “स्थायित्व के लिए जीवनशैली” अभियान की भी शुरुआत की।

भाषा प्रशांत शफीक

शफीक