“तार्किक विसंगति” निर्वाचन आयोग के प्रारूप के तहत मान्य नहीं : ममता बनर्जी का आरोप
“तार्किक विसंगति” निर्वाचन आयोग के प्रारूप के तहत मान्य नहीं : ममता बनर्जी का आरोप
(फोटो के साथ)
कोलकाता, 14 अप्रैल (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत प्रयुक्त “तार्किक विसंगति” निर्वाचन आयोग के प्रारूप के तहत आधिकारिक रूप से मान्य नहीं है और इसका इस्तेमाल बिहार के विपरीत पश्चिम बंगाल में चुनिंदा ढंग से भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है।
पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला, पूर्व मेदिनीपुर के तमलुक और हावड़ा के डोमजूर में जनसभाओं को संबोधित करते हुए बनर्जी ने महिलाओं से अपील की कि यदि लोगों को मतदान से रोकने की कोशिश की जाए तो वे “डटकर मुकाबला करें”। उन्होंने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी प्रकार की हिंसा के लिए नहीं कह रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग के ढांचे में तार्किक विसंगति’ जैसा कोई आधिकारिक शब्द नहीं है। इसे बिहार के विपरीत पश्चिम बंगाल में चुनिंदा तरीके से लागू किया जा रहा है ताकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा पहुंचाया जा सके।’’
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “मैंने ऐसी ‘ओछी पार्टी’ कभी नहीं देखी।”
बनर्जी ने कहा, ‘‘ केंद्रीय बलों का काम शांति बनाए रखना है, हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन अगर वे लोगों को वोट डालने से रोकेंगे तो क्या होगा? मैं महिलाओं से अनुरोध करूंगी कि वे अपने हाथों में झाड़ू रखें और बूट पहने एवं हथियार लिए लोगों के खिलाफ मजबूती से खड़ी हों। मैं किसी को हमला करने या दंगा भड़काने के लिए नहीं कह रही, लेकिन अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आपको हर संभव प्रयास करना होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने आपके अधिकारों की रक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय तक में याचिका दायर की, और उसके बाद ही 32 लाख मतदाताओं के नाम दर्ज किए गए।’’
बनर्जी ने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों को पश्चिम बंगाल क्यों बुलाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ … अगर आपका एकमात्र उद्देश्य यहां शांति बनाए रखना था, तो आप पश्चिम बंगाल पुलिस का इस्तेमाल कर सकते थे। ऐसा करने के बजाय, आपने उनकी सारी शक्तियां छीनकर बाहर से केंद्रीय बलों को क्यों बुलाया? प्राकृतिक आपदा या दंगे के दौरान तो इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय बल नहीं दिखाई देते।’’
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि अगर उन्हें किसी पुलिस अधिकारी द्वारा प्रताड़ित किया जाए तो वे उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराएं।
उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।’’
टीएमसी सुप्रीमो ने लोगों से भाजपा के खिलाफ वोट देने का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘ भाजपा ने आपसे सब कुछ छीन लिया है… इसके खिलाफ वोट देना ही आपके लिए बदला लेने का एकमात्र तरीका होगा। ’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उन स्थानों पर रैलियां कर रही है जिनका उत्तर प्रदेश और बिहार से सीधा रेल संपर्क है, ताकि वे उन राज्यों से लोगों को लाकर रैलियों के आयोजन स्थलों को भर सकें।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले, ‘बूथ एजेंटों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं’।
बनर्जी ने कहा कि टीएमसी चुनावों में भाजपा को ‘एक मजबूत राजनीतिक लड़ाई’ के माध्यम से हराएगी।
‘बर्नोल’ और ‘बोरोलीन’ शब्दों के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने कहा, “ ‘बर्नोल’ नहीं, हम आइसक्रीम देंगे। इतना डरने की क्या जरूरत है? जो लोग दूसरों को ‘बर्नोल’ से जलाने की बात कर रहे हैं, उनसे कहा जाना चाहिए कि आइसक्रीम उन्हें ठंडा रखने में मदद करेगी।”
दक्षिण कोलकाता के जिला चुनाव अधिकारी ने ‘बर्नोल’ और ‘बोरोलीन’ शब्दों का सोशल मीडिया पोस्ट में अराजक तत्वों को चेतावनी देते हुए इस्तेमाल किया था।
निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने के किसी भी प्रयास की स्थिति में सख्त कार्रवाई का भी संकेत दिया।
टीएमसी प्रमुख ने मतदान प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि गिनती के दौरान बाहरी लोगों को लाकर व्यवधान पैदा किया जा सकता है, जिसमें बिजली कटौती या ईवीएम से छेड़छाड़ शामिल है, जो कि “अलोकतांत्रिक” है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सोमवार को कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी का स्पष्ट रूप से जिक्र करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनावों से पहले बूथ एजेंटों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई भी मतदान केंद्रों पर न बैठ सके।
उन्होंने कहा, “टीएमसी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के आदेश दिए जा रहे हैं। ईडी और सीबीआई आधी रात को छापे मार रही हैं। लेकिन यह आसान नहीं होगा, क्योंकि अगर एक को गिरफ्तार किया जाएगा तो लाखों लोग बाहर आ जाएंगे।”
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना चार मई को होगी।
भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश
अविनाश

Facebook


