लोकसभा ने एफसीआरए विधेयक को संयुक्त समिति को भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी

लोकसभा ने एफसीआरए विधेयक को संयुक्त समिति को भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी

लोकसभा ने एफसीआरए विधेयक को संयुक्त समिति को भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी
Modified Date: August 12, 2026 / 02:58 pm IST
Published Date: August 12, 2026 2:58 pm IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) लोकसभा ने बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक, 2026 को विस्तृत समीक्षा और संभावित सुझावों के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी।

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और द्रमुक ने विधेयक को अल्पसंख्यकों के खिलाफ करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस विधेयक में एक भी प्रावधान अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है तथ यह सिर्फ देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ध्वनिमत से मंजूरी दी।

विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह विधेयक गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) और अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है।

उन्होंने दावा किया कि सरकार अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही है।

वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘इस विधेयक को वापस लिया जाए।’’

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा विपक्ष एफसीआरए विधेयक के खिलाफ है।

उन्होंने विधेयक को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया और कहा कि यह सरकार आज तक ऐसा कौन सा विधेयक लाई है जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं हो।

द्रमुक नेता टीआर बालू ने भी विधेयक को वापस लेने की मांग की।

अल्पसंख्यक और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस विधेयक में ऐसा एक भी प्रावधान नहीं है जो अल्पसंख्यकों या किसी भी समुदाय के खिलाफ हो।

उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं उठता।

रीजीजू का कहना था, ‘‘कांग्रेस और कई विपक्षी दलों ने खुद मांग की थी कि विधेयक को संयुक्त समिति को भेजा जाए और अब जब इसे भेजा जा रहा है तो इस पर आपत्ति क्यों है।’’

उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को विधेयक के किसी बिंदु का विरोध करना है तो वह संयुक्त समिति के समक्ष अपनी बात रख सकता है।

मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष कुछ समुदायों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।

विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ही सदन ने ध्वनिमत से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।

इसके बाद पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने अपराह्न दो बजकर 27 मिनट पर सदन की बैठक तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

नियम के अनुसार, इस संयुक्त समिति में 31 सदस्य होंगे, जिनमें लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल होंगे।

प्रस्ताव में कहा गया है कि समिति वर्ष 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक लोकसभा को रिपोर्ट सौंपेगी।

भाषा हक हक वैभव

वैभव


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