लोकसभा बीएसी: सत्ता पक्ष ने फिर की सहयोग की अपील, विपक्ष ने जनहित के मुद्दों पर चर्चा की मांग की
लोकसभा बीएसी: सत्ता पक्ष ने फिर की सहयोग की अपील, विपक्ष ने जनहित के मुद्दों पर चर्चा की मांग की
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) संसद के मानसून सत्र के लिए सर्वदलीय बैठक के बाद रविवार को लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक हुई, जिसमें विपक्ष ने अयोध्या, नीट पेपर लीक, एथनॉल नीति, मणिपुर और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग की, जबकि सरकार ने सदन सुचारू रूप से चलने देने में सहयोग की अपील की।
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में हुई बीएसी की बैठक में सरकार द्वारा पेश किए गए महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए समय तय किया गया।
उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने भी कुछ सुझाव दिए हैं, जिन्हें नोट कर लिया गया है।
रीजीजू ने विपक्ष से संसद की कार्यवाही के दौरान हंगामा नहीं करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार अगले दिन के लिए विधेयक के साथ तैयार है और उसके लिए समय भी निर्धारित किया जा चुका है।
मंत्री ने कहा, ‘‘अगर विपक्ष हंगामा नहीं करता है तो हम कल के लिए विधेयक के साथ तैयार हैं और समय भी तय है। अगर हंगामा होता है तो इससे समय की बर्बादी होगी और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ेगी।’’
वहीं, लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष सरकार के विधेयकों पर रचनात्मक भागीदारी और समर्थन के लिए तैयार है, लेकिन इसके बदले सरकार से महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर जवाब देने की अपेक्षा है।
गोगोई ने राम मंदिर और कुछ अन्य विषयों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार की ओर से इन मुद्दों पर चर्चा को लेकर अब तक कोई स्पष्ट तैयारी या रुख सामने नहीं आया है और वह केवल समय टालने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार राम मंदिर मुद्दे, नीट, एथनॉल नीति, मणिपुर की स्थिति और कृषि क्षेत्र तथा किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तैयार है?
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सरकार ने इन मुद्दों पर चर्चा को लेकर कोई स्पष्टता नहीं दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार इन विषयों से बचने की रणनीति बना रही है और सदन में ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, जिससे चर्चा बाधित हो।
गोगोई ने कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार यह स्पष्ट रूप से बताए कि वह इन मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है या नहीं तथा इन चर्चाओं की तारीख और समय भी घोषित करे, ताकि देश की जनता संसदीय बहस को देख सके।
उन्होंने कहा, ‘‘जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकार इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर कब और कितनी देर चर्चा करने के लिए तैयार है।’’
इससे पहले सर्वदलीय बैठक में भी विपक्ष ने इन विषयों पर चर्चा की मांग उठाई और सरकार ने सदन चलाने में सहयोग की अपील की।
भाषा हक नेत्रपाल
नेत्रपाल

Facebook


