खनिजों पर राज्यों के अतिरिक्त कर लगाने को रोकने के प्रावधान वाला विधेयक लोकसभा में पारित
खनिजों पर राज्यों के अतिरिक्त कर लगाने को रोकने के प्रावधान वाला विधेयक लोकसभा में पारित
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) लोकसभा ने बुधवार को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 विपक्ष के हंगामे के बीच पारित कर दिया, जिसके तहत राज्यों को खनिज अधिकारों पर अतिरिक्त कर लगाने से रोका जाएगा।
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए केंद्र सरकार ने खनिज वाले क्षेत्रों में खनिज संपदा की मात्रा से संबंधित निर्धारित मानकों के अनुसार खनिज-युक्त भूमि के विनियमन को भी अपने नियंत्रण में लेने का प्रावधान किया है।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच विधेयक को सदन में चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया।
विपक्षी सदस्य अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर चर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। इसके साथ ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रमुक के सदस्य विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक, 2026 को वापस लेने की मांग करते हुए भी हंगामा कर रहे थे, जिसे विस्तृत समीक्षा और संभावित सुझावों के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया है।
आरएसपी के एन. के. प्रेमचंद्रन ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ है।
हालांकि, सदन ने हंगामे के बीच ही बिना चर्चा के विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
विधेयक में कहा गया है, ‘‘राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकारों पर कोई कर, उपकर या ऐसा कोई अन्य शुल्क (किसी भी नाम से) नहीं लगाया जाएगा।’’
इसके प्रावधान खनिज-युक्त भूमि पर भी लागू होंगे। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अनुसार ही खनिज की मात्रा, उसके मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर ऐसी भूमि के संबंध में कोई कर या शुल्क लगाया जा सकेगा।
इस संबंध में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम में एक नयी धारा जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है।
इसके अलावा, विधेयक में प्रावधान किया गया है कि 2026 के संशोधन अधिनियम के लागू होने से पहले ऐसा कोई कर, उपकर या अन्य शुल्क, जो राज्य सरकार के पास जमा नहीं किया गया हो या जिसकी वसूली उसके द्वारा नहीं की गई हो, उसे हर लिहाज से अवैध माना जाएगा।
विधेयक में कहा गया है, ‘‘हालांकि, ऐसे लागू होने से पहले खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर लगाया गया कोई कर, उपकर या अन्य शुल्क, जो पहले ही राज्य सरकार के पास जमा किया जा चुका है या उसके द्वारा वसूल किया जा चुका है, वापस करने योग्य नहीं होगा।’’
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों के विवरण में कहा गया है कि इन संशोधनों का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में राजकोषीय व्यवस्था को निश्चित, स्थिर और पूर्वानुमेय बनाना है। इससे राष्ट्रीय आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को बढ़ावा मिलेगा और अंततः 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को हासिल करने में मदद मिलेगी।
भाषा वैभव सुभाष
सुभाष

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