मप्र: बाबर पर पुस्तक की चर्चा रद्द, लेखक ने जताया विरोध
मप्र: बाबर पर पुस्तक की चर्चा रद्द, लेखक ने जताया विरोध
भोपाल, 14 जनवरी (भाषा) मुगल सम्राट बाबर पर आधारित पुस्तक पर चर्चा रद्द किए जाने को लेकर वास्तुकार से लेखक बने आभास मालधियार ने बुधवार को विरोध जताया।
यह चर्चा नौ से 11 जनवरी तक हुए ‘भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल’ (बीएलएफ) में होनी थी।
मालधियार ने ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र ‘एक्स’ पर साझा किया और कहा कि उनकी पुस्तक ‘बाबर: द क्वेस्ट फॉर हिंदुस्तान’ पर प्रस्तावित सत्र को रद्द कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि एक अखबार ने उन पर बाबर का महिमामंडन करने का गलत आरोप लगाया था, जिसके बाद सत्र को रद्द किया गया।
लेखक ने कहा, “इन निराधार आरोपों के आधार पर कुछ तथाकथित हिंदू संगठनों ने गंभीर धमकियां दीं, जिनमें मेरी पुस्तक जलाने और पुस्तक दुकानों को नुकसान पहुंचाने की बातें शामिल थीं।”
मालधियार ने बेंगलुरु से फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पुस्तक पढ़े बिना ‘स्वदेश’ अखबार द्वारा प्रकाशित खबर के कारण यह स्थिति बनी और अंततः सत्र रद्द करना पड़ा।
अखबार ने हालांकि कहा कि उन्हें न तो लेखक से और न ही पुस्तक से कोई आपत्ति है, बल्कि वे बाबर को “अप्रासंगिक” मानते हैं।
मालधियार के अनुसार, उन्होंने अखबार को स्पष्टीकरण भेजा था, जिसे प्रकाशित नहीं किया गया और बाद में आयोजकों ने ‘प्राचीन वास्तुकला’ विषय पर एक अन्य सत्र आयोजित किया।
‘स्वदेश’ के संपादक अतुल तारे ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा कि उन्हें न तो पुस्तक से और न ही लेखक से कोई आपत्ति है।
उन्होंने कहा, “किताब में क्या है या क्या नहीं, यह हमारे लिए मुद्दा नहीं है। हमारा विरोध इस बात को लेकर है कि राम मंदिर स्थापित हो चुका है। ध्वज फहराया जा चुका है। और जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं, यह वर्ष सकारात्मक मुद्दों को आगे बढ़ाने का है। यह वंदे मातरम के 150 वर्ष और संघ का शताब्दी वर्ष है, इसलिए सकारात्मक विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।”
बीएलएफ के सह-निदेशक अभिलाष खंडेकर ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि महोत्सव के पहले दिन शहर पुलिस ने उनसे संपर्क कर पुस्तक पर चर्चा वाला सत्र रद्द करने को कहा क्योंकि आशंका थी कि इससे तोड़फोड़ हो सकती है।
उन्होंने कहा, “पुलिस ने विनम्रता से लेकिन स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी समस्या से बचने के लिए सत्र रद्द किया जाए। हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं लेकिन लेखक की सुरक्षा को देखते हुए सत्र रद्द किया गया।”
खंडेकर ने कहा कि बीएलएफ का उद्देश्य भोपाल को साहित्यिक शहर के रूप में स्थापित करना है लेकिन कुछ लोगों ने अपने निहित स्वार्थों के चलते विवाद खड़ा कर दिया।
भाषा दिमो जितेंद्र
जितेंद्र

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