शह मात The Big Debate: धान सारा चट हुआ…’चूहे’ अब भी जिंदा हैं! सवाल, आरोप और प्रदर्शन! क्या करप्शन के चूहों का पता लगा पाएगा प्रशासन?

धान सारा चट हुआ...'चूहे' अब भी जिंदा हैं! सवाल, आरोप और प्रदर्शन! Politics over paddy procurement in Chhattisgarh

शह मात The Big Debate: धान सारा चट हुआ…’चूहे’ अब भी जिंदा हैं! सवाल, आरोप और प्रदर्शन! क्या करप्शन के चूहों का पता लगा पाएगा प्रशासन?

paddy procurement in Chhattisgarh. Image Source- IBC24

Modified Date: January 15, 2026 / 12:14 am IST
Published Date: January 14, 2026 11:49 pm IST

रायपुरः paddy procurement in Chhattisgarh छत्तीसगढ़ में एक तरफ धान खऱीदी में दिक्कतों को लेकर व्यवस्था पर कई सवाल उठते रहे हैं। उससे भी ज्यादा फिक्र इस बात की है कि इतनी लंबी और महंगी प्रक्रिया के बाद धान संग्रहण केंद्रों पर रखा कई-कई क्विंटल अनाज खराब हो रहा है। गायब हो रहा है। सत्यापन के बाद जब केंद्र प्रभारियों से जवाब मांगा तो बताया गया कि तकरीन 10 करोड़ का धान चूहे खा गए। विपक्ष इस बात को हजम नहीं कर पा रहा है, सीधे-सीधे सरकार पर आरोप लगा रहा है कि धान चोरों पर एक्शन लें, वर्ना अपने नेताओं की मिलीभगत स्वीकार कहें। जवाब में बीजेपी ने कांग्रेस को भ्रम फैलाने वाली, फुर्सती पार्टी बताकर नसीहतों की घुट्टी पिलाई। सवाल ये है कि धान केंद्रों पर धान की कमी वास्तविक है तो फिर इसके वास्तविक चटकर्ता कौन हैं ?

जबसे ये पता चला है कि प्रदेश में धान संग्रहण केंद्रों पर 10 करोड़ का धान चूहे चट कर गए हैं। विपक्ष प्रदेश सरकार पर जमकर हमलावर है। राजधानी रायपुर में कांग्रेसी खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल को चूहा पकड़ने की जाली भेंट कर, मुद्दे पर कडड़ा विरोध जताने निकले, जिन्हें पुलिस ने बैरिकेटिंग कर बीच में रोका। दूसरी तरफ, पीसीसी चीफ दीपक बैज ने बस्तर में दो चूहा दिखाते हुए सरकार पर तंज कसा और पूछा कि ये वही चूहे तो नहीं, जिन्होंने प्रदेश में करोड़ों का ध्यान चट कर दिया हो।

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आरोपों पर डिप्टी सीएम ने किया पलटवार

paddy procurement in Chhattisgarh दरअसल, पिछले दिनों धान संग्रहण केंद्रों पर सत्यापन करने पर कई जगह धान की हिसाब गड़बड़ मिला। धान की शॉर्टेज मिलने पर अफसरों ने कहा कि धान चूहे खा रहे हैं, बताया गया कि कवर्धा, महासमुंद में चूहों के 10 करोड़ से अधिक का धान खा डाला। कांग्रेस कहती है कि बयान हास्यास्पद है और आरोप लगाया कि सरकार और अफसर कैसे भ्रष्टाचार में लिप्त है। आरोपों को खारिज कर जवाब देते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस केवल भ्रम फैला रही है।

संग्रहण केंद्रों पर धान की हेरा-फेरी!

ये तो तय है कि कई धान संग्रहण केंद्रों पर धान की हेरा-फेरी हुई है। ये भी तय है कि बिना मिलीभगत के इतनी मात्रा में धान गायब नहीं हो सकता। नियम के मुताबिक धान की शॉर्टेज की भरपाई समिति प्रबंधक और स्टाफ को करनी होगी, वो इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। तो क्या अब उनपर कोई सख्त एक्शन होगा या फिर ऐसे ही बेतुके तर्क दिए जाएंगे कि 10 करोड़ का धान चूहे खा गए?

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