मप्र: सिवनी के प्रसिद्ध ‘जम्बो सीताफल’ को मिला जीआई का दर्जा
मप्र: सिवनी के प्रसिद्ध ‘जम्बो सीताफल’ को मिला जीआई का दर्जा
सिवनी, 23 जून (भाषा) मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के प्रसिद्ध ‘जम्बो सीताफल’ को तीन साल के प्रयासों के बाद भौगोलिक संकेतक (जीआई) का दर्जा मिल गया। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
जिले के छपारा क्षेत्र के भूतबंधानी और आसपास के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला यह सीताफल अपने बड़े आकार (200 ग्राम से एक किलोग्राम तक), उत्कृष्ट स्वाद और उच्च गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की सहायक संचालक डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री में किए गए आवेदन पर सुनवाई के बाद महानियंत्रक (पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेड मार्क्स) और रजिस्ट्रार (भौगोलिक संकेत) कार्यालय ने सिवनी के सीताफल को जीआई का दर्जा प्रदान किया। उन्होंने बताया कि जीआई का दर्जा मिलने से अब सिवनी के ‘जम्बो सीताफल’ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिलेगी तथा इससे बाजार में इसके नाम के दुरुपयोग पर रोक लगेगी व मांग बढ़ने के साथ उत्पाद का मूल्य भी बेहतर होगा।
अधिकारी ने बताया कि दिल्ली, मुंबई, नागपुर और कानपुर जैसे महानगरों में पहले से ही इस सीताफल की अच्छी मांग है।
उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि से सीताफल उत्पादक किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ इसके प्रसंस्करण और निर्यात के नए अवसर भी खुलेंगे।
अधिकारी ने बताया कि सीताफल से पल्प, आइसक्रीम, शेक, रबड़ी, बासुंदी, लस्सी और मिठाइयां तैयार की जाती हैं।
उन्होंने बताया कि इसके पत्तों और छिलकों का उपयोग जैविक खाद तथा औषधीय उत्पादों के निर्माण में भी किया जाता है।
उपवंशी-वासेवार ने बताया कि विभाग ने जिले के सीताफल उत्पादक किसानों को संगठित कर दो किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन किया है।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा जिले में तीन सीताफल पल्प प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, लाल-भूरी मिट्टी के कारण ‘जम्बो सीताफल’ में आयरन की मात्रा अधिक होती है, जिससे इसकी मिठास और औषधीय गुण बढ़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस विशेष सीताफल की खेती और संग्रहण जिले के 3,000 से अधिक आदिवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है।
अधिकारी के मुताबिक, जिले में प्रतिवर्ष 695 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 6,090 मीट्रिक टन सीताफल का उत्पादन होता है और इससे करीब 20 से 25 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
भाषा सं ब्रजेन्द्र जितेंद्र
जितेंद्र

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