महाराष्ट्र की झांकी में गणेशोत्सव और आत्मनिर्भरता का संदेश प्रदर्शित

महाराष्ट्र की झांकी में गणेशोत्सव और आत्मनिर्भरता का संदेश प्रदर्शित

महाराष्ट्र की झांकी में गणेशोत्सव और आत्मनिर्भरता का संदेश प्रदर्शित
Modified Date: January 26, 2026 / 02:55 pm IST
Published Date: January 26, 2026 2:55 pm IST

नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र ने सोमवार को गणतंत्र दिवस परेड में अपनी झांकी में गणेशोत्सव को आत्मनिर्भरता का प्रतीक दिखाते हुए आधुनिकता और परंपरा का मिश्रण प्रस्तुत किया।

झांकी के दोनों ओर पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं के एक दल ने ‘लेझिम’ लोकनृत्य का प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का सामुदायिक आयोजन बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में शुरू किया था, ताकि ब्रिटिश शासन के खिलाफ लोगों को संगठित कर एकता और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया जा सके।

इस झांकी में व्यक्त आत्मनिर्भरता के विषय आर्थिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों को शामिल करते हैं।

झांकी के अग्रभाग में गणेशोत्सव से जुड़ा पारंपरिक ढोल बजाते हुए एक महिला को दिखाया गया। मध्य भाग में एक गणेश भक्त मूर्ति को सिर पर लेकर गणेश विसर्जन के लिए जाते हुए, पीछे के हिस्से में एक मूर्तिकार को भगवान गणेश की मूर्ति बनाते हुए प्रदर्शित किया गया था। झांकी के अंतिम भाग में महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिरों का प्रतिनिधित्व करती एक मंदिर की झलक दिखाई गई थी।

भाषा मनीषा अमित

अमित


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