कन्नूर डेंटल कॉलेज में छात्र की मौत मामले में मुख्य आरोपी चिकित्सक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

कन्नूर डेंटल कॉलेज में छात्र की मौत मामले में मुख्य आरोपी चिकित्सक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

कन्नूर डेंटल कॉलेज में छात्र की मौत मामले में मुख्य आरोपी चिकित्सक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
Modified Date: April 25, 2026 / 07:56 pm IST
Published Date: April 25, 2026 7:56 pm IST

कन्नूर (केरल), 26 अप्रैल (भाषा) कन्नूर डेंटल कॉलेज में एक छात्र की मौत के मामले में मुख्य आरोपी चिकित्सक की अग्रिम जमानत याचिका एक अदालत ने शनिवार को खारिज कर दी, जबकि एक अन्य संकाय सदस्य की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।

कन्नूर जिला एवं प्रधान सत्र न्यायालय के प्रभारी न्यायाधीश विमल जे. ने मुख्य आरोपी डॉ. एम. के. राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। डॉ. एम. के. राम अंजराकांडी स्थित एक निजी प्रबंधन संस्थान (कन्नूर डेंटल कॉलेज) के एनाटॉमी विभाग के पूर्व प्रमुख थे।

संकाय की एक अन्य सदस्य डॉ. संगीता नाम्बियार को अग्रिम जमानत दी गई।

बीडीएस प्रथम वर्ष का छात्र नितिन राज 10 अप्रैल को कॉलेज परिसर में एक इमारत से गिरने के बाद मृत पाया गया और माना जा रहा है कि यह आत्महत्या का मामला है।

हालांकि पुलिस ने शुरू में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में जब राज के परिजनों ने यह आरोप लगाया कि संकाय सदस्यों द्वारा उसे जाति और रंग के आधार पर परेशान किया गया था तो पुलिस ने राम और नाम्बियार को आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोपी बनाया।

कन्नूर साइबर पुलिस ने बाद में एक अलग मामला दर्ज किया जब यह पता चला कि राज ने एक लोन ऐप के माध्यम से पैसे उधार लिए थे और ऐप के संचालकों ने उसके शिक्षक से संपर्क किया था, जिन्होंने फिर कॉलेज के अधिकारियों से शिकायत की।

राज की मृत्यु के बाद, राम और नाम्बियार दोनों छिप गए और अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया।

सुनवाई के दौरान, राम ने जाति या रंग के आधार पर राज को परेशान करने से इनकार किया।

उन्होंने तर्क दिया कि राज पढ़ाई में कमजोर था और उसके आंतरिक अंक बहुत कम होने के कारण उन्होंने उसे केवल सुधार करने की सलाह दी थी।

राम ने दावा किया कि राज लोन ऐप संचालकों के उत्पीड़न के कारण दबाव में था और उन्होंने छात्र की मौत में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान उनके खिलाफ लागू नहीं किए जा सकते क्योंकि वे अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित हैं।

नाम्बियार ने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में उनकी कोई संलिप्तता नहीं थी और उन्होंने कभी भी राज को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया था।

अभियोजन पक्ष ने दोनों शिक्षकों की जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए तर्क दिया कि राम ने राज को बार-बार परेशान किया गया था और अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी गई थी।

सभी पक्षों की बात सुनने और मामले की गंभीरता तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने राम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जबकि नाम्बियार की याचिका को स्वीकार कर लिया।

भाषा

शुभम रंजन

रंजन


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