बर्लिन के अंतरराष्ट्रीय यात्रा-व्यापार मेले में राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थल प्रदर्शित किए जाएंगे

बर्लिन के अंतरराष्ट्रीय यात्रा-व्यापार मेले में राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थल प्रदर्शित किए जाएंगे

बर्लिन के अंतरराष्ट्रीय यात्रा-व्यापार मेले में राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थल प्रदर्शित किए जाएंगे
Modified Date: March 1, 2026 / 01:09 pm IST
Published Date: March 1, 2026 1:09 pm IST

जयपुर, एक मार्च (भाषा) राजस्थान पर्यटन विभाग जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रा एवं व्यापार मेले में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को प्रदर्शित करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

पर्यटन विभाग के अनुसार, “फ्रॉम डेजर्ट टू राइन” विषय के साथ राजस्थान पर्यटन अपनी विरासत, विविध प्राकृतिक परिदृश्यों और पर्यटन से जुड़ी पहलों को तीन से पांच मार्च तक आयोजित होने वाले इस आयोजन में वैश्विक हितधारकों के सामने प्रस्तुत करेगा।

पर्यटन आयुक्त रुक्मणी रियार ने बताया कि 2025 में राज्य में 19,45,068 विदेशी पर्यटक आए। इनमें 25 प्रमुख यूरोपीय देशों से 5,75,968 पर्यटक आए, जो कुल विदेशी पर्यटकों का करीब 29.6 प्रतिशत है।

उन्होंने बताया कि 82,703 पर्यटकों के साथ जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा, जबकि पहले और दूसरे स्थान पर क्रमश: ब्रिटेन और फ्रांस रहे।

रियार ने कहा, “राजस्थान के आकर्षणों में थार मरुस्थल, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान जैसे वन्यजीव स्थल तथा ऐतिहासिक किले और महल शामिल हैं।”

उन्होंने बताया कि आमेर किला, चित्तौड़गढ़ किला, कुंभलगढ़ किला, रणथंभौर किला, गागरोन किला और जैसलमेर किला यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। इसके अलावा, जयपुर के परकोटा को 2019 में यूनेस्को विश्व धरोहर शहर का दर्जा मिला था।

रियार ने कहा, “रेगिस्तान सफारी, पारंपरिक हस्तशिल्प और लोक उत्सव पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं।’’

पर्यटन विभाग के अनुसार, राज्य ईको-कैंप, सामुदायिक होमस्टे और भड़ला सौर पार्क सहित हरित ऊर्जा परियोजनाएं जैसी पहलों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित करेगा।

विभाग ने बताया कि मेले के दौरान राजस्थान का प्रतिनिधिमंडल यूरोपीय पर्यटक संचालकों के साथ बैठकें करेगा, सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देगा तथा जर्मन और यूरोपीय बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए नए पर्यटन सर्किट और यात्रा पैकेज पेश करेगा।

भाषा बाकोलिया खारी

खारी


लेखक के बारे में