मलप्पुरम विस्फोटक मामला: एनआईए ने बड़ी साजिश की आशंका जताई
मलप्पुरम विस्फोटक मामला: एनआईए ने बड़ी साजिश की आशंका जताई
कोच्चि, दो जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने एक विशेष अदालत को बताया कि जांच एजेंसी इस वर्ष फरवरी में मलप्पुरम जिले से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने के मामले में कर्नाटक के तालिकोटी स्थित एक फर्म से जुड़ी बड़ी आपराधिक साजिश की जांच कर रही है।
एनआईए, सात फरवरी 2026 को मलप्पुरम के तिरुरंगाडी में प्याज की बोरियां ले जा रहे एक ट्रक से 89,600 जिलेटिन की छड़ें और 1.05 लाख गैर-विद्युत डेटोनेटर बरामद होने के मामले की जांच कर रही है।
कर्नाटक के बीजापुर निवासी मंतागौंड बिरादर (35) और कर्नाटक के तालिकोटी निवासी बापागौड़ भीरमाया चौधरी (47) ने हाल ही में उनसे पूछताछ के लिए एजेंसी द्वारा कदम उठाए जाने के बाद अग्रिम जमानत का अनुरोध करते हुए कोच्चि स्थित एनआईए अदालत का रुख किया था।
एनआईए ने अदालत को बताया कि बिरादर और चौधरी चेतन एंटरप्राइजेज के मालिक हैं, जिसने बरामद किए गए विस्फोटकों की तस्करी की थी।
एजेंसी के अनुसार, बिरादर ने इन विस्फोटकों को तमिलनाडु की वेत्रिवेल एक्सप्लोसिव्स और ट्राइडेंट एक्सप्लोसिव्स से खरीदा था।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि जांच में यह सामने आया कि विस्फोटकों के पैकेटों पर लगाए गए बारकोड लेबल को उनके स्रोत, स्वामित्व और तस्करी को छिपाने के उद्देश्य से जानबूझकर हटाया गया था या उनके साथ छेड़छाड़ की गई थी।
तालिकोटी स्थित चेतन एंटरप्राइजेज के मैगजीन परिसर की तलाशी के दौरान जांचकर्ताओं ने डेटोनेटर और फर्जी बारकोड लेबल बरामद किए।
एनआईए ने अदालत को बताया, “ये परिस्थितियां एक बड़े आपराधिक षड्यंत्र की ओर संकेत करती हैं और प्रथम दृष्टया विस्फोटक पदार्थों के अवैध तरीके से प्रबंधन और तस्करी का खुलासा करती हैं। इसलिए विस्फोटकों के स्रोत, उन्हें लाने-ले जाने और उनके संभावित उपयोग का पता लगाने के लिए याचिकाकर्ताओं से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है।”
एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं की आपराधिक षड्यंत्र में संलिप्तता को दर्शाती है और इस अपराध के पीछे एक बड़े नेटवर्क के मौजूद होने का संकेत देती है।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि वे लाइसेंस प्राप्त विस्फोटक कारोबारी हैं और उन्होंने इन सामग्रियों को अधिकृत निर्माताओं से कानूनी रूप से खरीदा था।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि चूंकि विस्फोटकों का उनके पास होना वैध था इसलिए विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा चार व पांच के तहत अपराध नहीं बनता और अधिक से अधिक इन आरोपों को विस्फोटक अधिनियम, 1884 के तहत उल्लंघन माना जा सकता है, जो जमानती है।
याचिकाकर्ताओं ने कर चालान, फर्म का पंजीकरण प्रमाणपत्र और चेन्नई स्थित दक्षिण सर्किल के संयुक्त मुख्य विस्फोटक नियंत्रक द्वारा जारी लाइसेंस भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
एनआईए ने हालांकि बताया कि बारकोड लेबल को जानबूझकर हटाना और नष्ट करना महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने तथा नियामकीय निगरानी व्यवस्था को विफल करने का प्रयास था, जिसके कारण बड़े षड्यंत्र की विस्तृत जांच आवश्यक हो गई है।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं को इस खेप से संबंधित जीएसटी ई-वे बिल प्रस्तुत करने को कहा लेकिन वे ऐसा करने में विफल रहे।
विशेष न्यायाधीश पी. के. मोहनदास ने सबूतों पर गौर करने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले की उचित जांच के लिए याचिकाकर्ताओं से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है।
भाषा जितेंद्र नरेश
नरेश

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