ममता बनर्जी के पास अपने पद से इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है: विशेषज्ञ
ममता बनर्जी के पास अपने पद से इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है: विशेषज्ञ
नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से इनकार करने पर विशेषज्ञों ने मंगलवार को कहा कि उन्हें इस्तीफा देना ही होगा अन्यथा राज्यपाल उन्हें बर्खास्त कर सकते हैं।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यपाल द्वारा सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किए जाने पर नए व्यक्ति के पदभार ग्रहण करते ही बनर्जी का मुख्यमंत्री कार्यकाल स्वतः समाप्त हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका और निवर्तमान विधानसभा का कार्यकाल सात मई को समाप्त हो रहा है।
संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव पी डी टी आचारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद बनर्जी के पास पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि एक राज्य में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते।’’
वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने कहा कि नए मुख्यमंत्री के पदभार संभालने के बाद, ‘‘वह पद से हट चुकी मानी जाएंगी।’’
आचारी ने इस बात पर भी जोर दिया कि वह निवर्तमान विधानसभा के लिए चुनी गई थीं। विधानसभा का कार्यकाल सात मई को समाप्त हो रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सरकार विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है। कार्यकाल समाप्त होने पर सरकार को भी जाना पड़ता है।’’
उन्होंने कहा कि उनके पद पर बने रहने का एकमात्र प्रावधान तब है जब राज्यपाल सरकार को कुछ दिनों के लिए सत्ता में बने रहने के लिए कहें।
भाजपा द्वारा तृणमूल कांग्रेस को हराने के बाद मीडिया से पहली बातचीत में बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और संवैधानिक पदाधिकारी को कार्रवाई करने की चुनौती दी।
कोलकाता में बनर्जी ने प्रेस वार्ता में मतगणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया और दावा किया कि लगभग 100 सीट पर जनादेश ‘लूटा’ गया है और उनकी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना धीमी की गई है।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनादेश से नहीं बल्कि एक साजिश से हुई है। मैं हारी नहीं हूं; मैं लोकभवन नहीं जाऊंगी। वे संवैधानिक मानदंडों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।’’
बनर्जी के बयान के मद्देनजर पश्चिम बंगाल की राज्यपाल के सामने उपलब्ध संवैधानिक या कानूनी विकल्पों के बारे में पूछे जाने पर, वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक कानून विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी ने कहा कि राजनीतिक नैतिकता और संवैधानिक अनुशासन की मांग है कि वह इस्तीफा दे दें।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन किसी भी स्थिति , नयी विधानसभा चुनी जा चुकी है और जल्द ही कोई भाजपा नेता मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश करेगा और राज्यपाल उसे नियुक्त कर देंगे। ऐसे में अगर बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं तो राज्यपाल उन्हें बर्खास्त कर देंगे।’’
वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने कहा, ‘‘राज्यपाल को उन्हें बर्खास्त करना ही होगा।’’
सिन्हा ने कहा, ‘‘ममता बनर्जी को इस्तीफा देना होगा। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राज्यपाल को बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाना होता है और उसे सदन में बहुमत साबित करना होता है… नए राज्यपाल के पदभार संभालने के बाद, उन्हें पद से मुक्त मान लिया जाता है।’’
अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी ने राज्यपाल की नई सरकार के गठन में शक्ति और विवेकाधिकार से संबंधित निर्णयों समेत सरकारिया आयोग की रिपोर्ट और एसआर बोम्मई मामले का हवाला देते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल को आमंत्रित करते समय राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता लेने के लिए बाध्य नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार गठन के लिए विवेकाधिकार का प्रयोग करते समय सदन में बहुमत प्राप्त दल या चुनाव पूर्व या चुनाव पश्चात गठबंधन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
तिवारी ने कहा, “पश्चिम बंगाल के मामले में, इसमें कोई संदेह नहीं है कि सदन में बहुमत प्राप्त सबसे बड़ा दल कौन सा है। भाजपा के पास विधानसभा की 294 सीट में से 200 से अधिक सीट हैं। उनके पास बहुमत है। राज्यपाल के पास भाजपा को सरकार बनाने के लिए न बुलाने का कोई विवेकाधिकार नहीं है।”
तिवारी ने कहा, “जहां तक ममता बनर्जी मुख्यमंत्री कह रही हैं कि वह पद से इस्तीफा नहीं देंगी, तो उसमें कोई सवाल ही नहीं है। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल और विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और वह अब राज्य की मुख्यमंत्री नहीं हैं। जैसे ही कोई नया व्यक्ति शपथ लेगा, वह पद से हट जाएंगी।”
वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने कहा कि बनर्जी को चुनाव प्रक्रिया और परिणाम से असहमति हो सकती है, लेकिन कोई भी मुख्यमंत्री जनता के जनादेश के विरुद्ध जाकर पद पर नहीं रह सकता।
भाषा राजकुमार माधव
माधव

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