‘भ्रष्टाचारियों-अपराधियों के गठजोड़’ को बचाने के लिए आरएसएस-मोदी के प्रति ममता ने रुख नरम किया: माकपा

‘भ्रष्टाचारियों-अपराधियों के गठजोड़’ को बचाने के लिए आरएसएस-मोदी के प्रति ममता ने रुख नरम किया: माकपा

‘भ्रष्टाचारियों-अपराधियों के गठजोड़’ को बचाने के लिए आरएसएस-मोदी के प्रति ममता ने रुख नरम किया: माकपा
Modified Date: November 29, 2022 / 08:35 pm IST
Published Date: September 26, 2022 6:37 pm IST

नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने ‘भ्रष्टाचारियों-अपराधियों के गठजोड़’ को बचाने के प्रयास में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना रुख नरम कर लिया है। माकपा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ‘भ्रष्टाचारियों-अपराधियों का गठजोड़’ बनकर रह गई है।

पार्टी के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ के संपादकीय में एक प्रेसवार्ता में दिये गये ममता बनर्जी के बयान को उद्धृत करते हुए कहा गया कि उन्होंने (ममता ने) हाल ही में कुछ नयी खोज की हैं।

इसमें कहा गया है कि आरएसएस और नरेंद्र मोदी में सदगुणों का मिलना संकेत करता है कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख इस गठजोड़ को बचाने के लेकर बेताब हैं।

संपादकीय में कहा गया कि संघ-भाजपा के साथ उनके इस तरह के तालमेल से चकित नहीं होना चाहिए, क्योंकि पहले भी ममता बनर्जी केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के हाथों हार के बाद सियासी जमीन फिर से हासिल करने के प्रयास के बीच वाम दल ने तृणमूल कांग्रेस पर यह हमला किया। फिलहाल भाजपा पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल है।

संपादीयक में, बनर्जी को संवाददाता सम्मेलन में यह कहते हुए उद्धृत किया गया है कि ‘आरएसएस बुरा नहीं’ है। संपादकीय में कहा गया, ‘‘इसी तरह उन्होंने एक और आविष्कार किया, वह इस बात में विश्वास नहीं करतीं कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेसियों के दुरुपयोग के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ है। ’’

संपादकीय में विधानसभा में दिये गये उनके इस बयान को भी उद्धृत किया गया जिसमें तृणमूल प्रमुख ने कहा था, ‘‘संभवत: आप नहीं जानते कि ये एजेंसियां अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ)के अंतर्गत नहीं आतीं। ये अब केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नियंत्रित की जाती हैं।’’

लेकिन संपादकीय में बताया गया कि आधिकारिक तौर पर सीबीआई कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के तहत आती है, जिस पर पीएमओ का नियंत्रण है।

भाषा संतोष मनीषा

मनीषा


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