गुरुग्राम में प्रेमिका को जिंदा जलाने के आरोप में एक व्यक्ति गिरफ्तार

गुरुग्राम में प्रेमिका को जिंदा जलाने के आरोप में एक व्यक्ति गिरफ्तार

गुरुग्राम में प्रेमिका को जिंदा जलाने के आरोप में एक व्यक्ति गिरफ्तार
Modified Date: July 2, 2026 / 10:30 pm IST
Published Date: July 2, 2026 10:30 pm IST

गुरुग्राम, दो जुलाई (भाषा) गुरुग्राम में एक व्यक्ति को कथित तौर पर अपनी प्रेमिका को जिंदा जलाकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह घटना दोनों के बीच विवाद के बाद उस समय हुई, जब महिला को पता चला कि वह व्यक्ति पहले से शादीशुदा है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि आरोपी सुनील कुमार (35) हरियाणा के झज्जर जिले के गुभाना गांव का रहने वाला है। पुलिस ने बताया कि आरोपी को बुधवार को गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

पुलिस के अनुसार, 19 जून को ‘आर्टेमिस हॉस्पिटल’ से सूचना मिली कि यहां के बसई गांव की रहने वाली 23 वर्षीय दिव्या कटारिया को गंभीर रूप से झुलसने के बाद वहां लाया गया था।

पुलिस ने बताया कि शुरुआती इलाज के बाद उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस ने जब महिला और उनकी मां से बात की तो दोनों ने कहा कि वे इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करना चाहतीं।

कटारिया की 27 जून को इलाज के दौरान मौत हो गई। उसकी मौत के बाद, उसके रिश्तेदार विकास ने 30 जून को सेक्टर-9ए थाने में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, कटारिया ने 22 जून को उसे बताया कि सुनील उर्फ नोनी ने उसे आग लगा दी थी और धमकी दी थी कि अगर उसने किसी को सच बताया तो वह उसे, उसकी मां और उसकी बहन की हत्या कर देगा।

पुलिस ने बताया कि सेक्टर-9ए थाने की एक टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि 18 जून को कटारिया, कुमार की सोना खरीदने वाली दुकान पर गई थीं। वहां दोनों के बीच बहस हुई क्योंकि उसे पता चल गया था कि कुमार शादीशुदा है। बहस के दौरान कुमार ने उन पर केरोसिन डाल दिया।

उन्होंने बताया कि विवाद सुलझाने की कोशिश में कटारिया ने सोहना रोड पर सेंट्रल पार्क में एक फ्लैट बुक किया, जहां वे दोनों रात भर रुके। उन्होंने बताया कि 19 जून की सुबह दोनों के बीच फिर से बहस हुई, जिसके दौरान कुमार ने पीड़िता को आग लगा दी और बाद में उसे ‘आर्टेमिस हॉस्पिटल’ ले गया।

भाषा

शुभम माधव

माधव


लेखक के बारे में