मुर्शिदाबाद में व्यक्ति की मौत, परिवार ने एसआईआर नोटिस से तनाव का आरोप लगाया

मुर्शिदाबाद में व्यक्ति की मौत, परिवार ने एसआईआर नोटिस से तनाव का आरोप लगाया

मुर्शिदाबाद में व्यक्ति की मौत, परिवार ने एसआईआर नोटिस से तनाव का आरोप लगाया
Modified Date: January 20, 2026 / 05:22 pm IST
Published Date: January 20, 2026 5:22 pm IST

कोलकाता, 20 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी इलाके में मंगलवार सुबह 50 वर्ष से अधिक उम्र के एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मृतक के परिवार का आरोप है कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से संबंधित नोटिस के कारण हुए अत्यधिक मानसिक तनाव से उसकी मृत्यु हुई।

पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान नवदापाड़ा गांव के निवासी अक्षत अली मंडल के रूप में हुई है। परिवार का कहना है कि नोटिस में उनके बच्चों की संख्या छह से अधिक होने की गलत जानकारी दी गई थी, जिससे वह घबरा गए थे।

परिजनों ने बताया कि मंडल अकेले रहते थे, जबकि उनके पांच बेटे राज्य के बाहर और विदेश में काम करते हैं।

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परिवार के एक सदस्य ने कहा, ‘नोटिस के कारण उन्हें गंभीर चिंता हुई क्योंकि वह बेटों की वापसी की व्यवस्था करने और अधिकारियों के सामने पेश होने तथा आवश्यक दस्तावेज पेश करने को लेकर चिंतित थे। बताया जा रहा है कि नोटिस मिलने के कुछ ही दिनों के भीतर ही वह बीमार पड़े और उन्हें सादिखरदियार ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।’

मंडल की पत्नी शरीफा बीबी ने बताया कि उनकी मृत्यु से तीन दिन पहले नोटिस आया था और तब से उनके पति लगातार दहशत में थे।

पारिवारिक सूत्रों ने यह भी बताया कि मंडल के चार बेटे केरल में काम करते हैं और एक सऊदी अरब में रहता है। जहां केरल में रहने वाले बेटों ने 27 जनवरी को होने वाली सुनवाई के लिए वापसी की टिकट ले ली थी, वहीं विदेश में रहने वाला बेटा इस सुनवाई में शामिल होने में असमर्थ था।

स्थानीय पंचायत प्रधान महाबुल इस्लाम ने आरोप लगाया कि नोटिस में मंडल के बेटों की संख्या को लेकर दी गई गलत जानकारी ने उसकी चिंता और बढ़ा दी थी।

इस घटना के कारण स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश और अशांति व्याप्त है। यहां के निवासी एसआईआर नोटिस जारी करने की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। राज्य युवा कांग्रेस के सचिव यूसुफ अली ने इस प्रकार के उत्पीड़न को ‘अमानवीय’ करार दिया है और मामले की निष्पक्ष जांच व दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से यह पुरजोर अपील की है कि वे इस तरह के नोटिस जारी करते समय अधिक संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं ताकि भविष्य में किसी भी आम नागरिक को इस तरह के जानलेवा मानसिक तनाव और उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।

भाषा प्रचेता मनीषा

मनीषा


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