औषधीय पौधे मिट्टी के स्वास्थ्य और किसानों के लिए फायदेमंद: राष्ट्रपति मुर्मू

औषधीय पौधे मिट्टी के स्वास्थ्य और किसानों के लिए फायदेमंद: राष्ट्रपति मुर्मू

औषधीय पौधे मिट्टी के स्वास्थ्य और किसानों के लिए फायदेमंद: राष्ट्रपति मुर्मू
Modified Date: February 25, 2026 / 05:04 pm IST
Published Date: February 25, 2026 5:04 pm IST

(फोटो के साथ)

बुलढाणा (महाराष्ट्र), 25 फरवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि औषधीय पौधों की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करती है, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य और संरक्षण में भी योगदान देती है।

महाराष्ट्र के बुलढाणा स्थित शेगांव में आयोजित राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 के उद्घाटन के बाद मुर्मू ने यह भी कहा कि औषधीय पौधों का ‘‘मूल्यवान भंडार’’ न केवल दवाओं के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराता है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी आवश्यक है।

आयुष मंत्रालय (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) ने अखिल भारतीय आयुर्वेदिक महासम्मेलन के सहयोग से 25 से 28 फरवरी के बीच यहां राष्ट्रीय आरोग्य मेले का आयोजन किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वह आयुर्वेद को बढ़ावा देती हैं और आयुर्वेदिक जीवनशैली को अपनाया है।

उन्होंने बताया कि उनका जन्म और पालन-पोषण प्रकृति की गोद में हुआ है।

मुर्मू ने कहा, ‘‘कहा जाता है कि प्रकृति शरीर की सभी जरूरतों का ख्याल रखती है। लेकिन समय बदल गया है और आज हमें दवाओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है क्योंकि जंगल लुप्त होते जा रहे हैं। जंगलों को जलाया जा रहा है और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां एवं औषधीय पौधे भी खत्म हो रहे हैं। इसलिए, आज मुझे लगता है कि न केवल सरकार बल्कि सभी को इस बारे में सोचना चाहिए और बेहतर स्वास्थ्य के लिए औषधीय पौधों उगाने की दिशा में काम करना चाहिए।’’

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आयुर्वेद शोधकर्ताओं को भी औषधीय पौधे प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने सरकार पर निर्भरता के बिना औषधीय पौधों की खेती की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारतीय परंपरा कहती है ‘आरोग्यम परम सुखम’, जिसका अर्थ है कि समग्र स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा सुख है। स्वस्थ नागरिक देश को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।’’

उन्होंने कहा कि देशवासियों को स्वस्थ रखने में आयुष चिकित्सा पद्धतियों ने अमूल्य योगदान दिया है तथा योग, आयुर्वेद और सिद्ध जैसी चिकित्सा पद्धतियां उस समय से लोगों के काम आ रही हैं जब आधुनिक चिकित्सा पद्धति का प्रचलन नहीं था।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमारे खेतों, रसोई घरों और जंगलों में औषधीय पौधों और स्वास्थ्यवर्धक जड़ी-बूटियों का बहुमूल्य भंडार मौजूद है। इस बहुमूल्य संपदा का संरक्षण और संवर्धन औषधियों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘औषधीय पौधों की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करती है, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य और संरक्षण में भी योगदान देती है। इसलिए, आयुष पद्धतियों को बढ़ावा देने से न केवल लोगों का शारीरिक और आर्थिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, औषधियों का मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे कदम आयुष प्रणालियों की मान्यता और स्वीकृति को और बढ़ाएंगे।

राष्ट्रीय आरोग्य मेला चार दिवसीय आयोजन है जो आयुष प्रणालियों के माध्यम से सुलभ, निवारक और समुदाय आधारित स्वास्थ्य देखभाल पर केंद्रित है।

उद्घाटन समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव उपस्थित थे।

भाषा सुभाष संतोष

संतोष


लेखक के बारे में