मेघालय: दुनिया के सबसे अधिक बारिश वाले शहर मावसिनराम और चेरापूंजी में सूखे का खतरा
मेघालय: दुनिया के सबसे अधिक बारिश वाले शहर मावसिनराम और चेरापूंजी में सूखे का खतरा
शिलांग, 21 सितंबर (भाषा) मेघालय के मावसिनराम और चेरापूंजी, जो दुनिया के सबसे अधिक बारिश वाले स्थानों में शामिल हैं, में सूखे का खतरा बढ़ रहा है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यहां भारी बारिश हो रही है, लेकिन बारिश वाले दिनों की संख्या घट रही है और तापमान बढ़ रहा है।
हाल में ‘थियोरेटिकल एंड एप्लाइड क्लाइमेटोलॉजी’ में प्रकाशित इस अध्ययन में 1981 से 2100 की अवधि के लिए मेघालय और आसपास के इलाकों के अनुमानित जलवायु और जल विज्ञान संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, ताकि बारिश की तीव्रता बढ़ने के साथ सूखे का खतरा बढ़ने के इस विरोधाभास को समझा जा सके।
अनुसंधानकर्ताओं अशेष रुद्र पॉल और पंकज कुमार रॉय ने पाया कि बारिश अब तेज बौछारों के रूप में सिमटती जा रही है, जबकि हल्की बारिश और बारिश के दिनों की संख्या में कमी आ रही है।
अध्ययन में सरल दैनिक तीव्रता सूचकांक (एसडीआईआई) में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें स्थानीय स्तर पर अधिकतम वृद्धि प्रति वर्ष 0.08 मिलीमीटर प्रतिदिन रही।
इस बीच, बारिश वाले दिनों की संख्या में हर साल औसतन 0.40 दिनों की कमी आई।
एसडीआईआई एक जलवायु सूचकांक है, जो किसी निश्चित अवधि में “बारिश वाले दिन” होने वाली औसत वर्षा की मात्रा को मापता है। इसे आमतौर पर मिलीमीटर प्रति दिन (मिमी/दिन) में व्यक्त किया जाता है।
शोधकर्ताओं ने कहा, “अधिक वर्षा से सूखे की स्थिति कम होती है संबंधी आम धारणा के विपरीत अध्ययन के निष्कर्षों में मेघालय में सूखे के बढ़ते खतरे की स्पष्ट प्रवृत्ति सामने आई है।”
शोधकर्ताओं ने कहा कि बदलता वर्षा का स्वरूप मेघालय के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां का भू-भाग ढलानदार है और मिट्टी की परत उथली है।
तेज बारिश के कारण पानी मिट्टी में समाने के बजाय तेजी से सतह पर बह जाता है, जिससे भूजल का पुनर्भरण कम हो जाता है। नतीजतन, मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में बारिश होने के बावजूद शुष्क महीनों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता।
अध्ययन में कहा गया, “बारिश के इस तरह सीमित अवधि में केंद्रित होने से सतह पर पानी का बहाव बढ़ता है और पानी के मिट्टी में समाने की प्रक्रिया कम हो जाती है।”
बढ़ता तापमान भी इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है, क्योंकि इससे वाष्पोत्सर्जन बढ़ रहा है, यानी मिट्टी, वनस्पतियों और अन्य सतहों से पानी का नुकसान अधिक हो रहा है। अध्ययन में पाया गया कि न्यूनतम तापमान में हर साल 0.08 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो रही है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि बढ़ते तापमान से वायुमंडल में पानी की मांग बढ़ती है और बारिश न होने की अवधि में मिट्टी की नमी तेजी से कम होती है।
भाषा तान्या वैभव
वैभव

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