शिलॉन्ग, 22 सितंबर (भाषा) मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सजा पूरी होने के बावजूद अब भी कारागारों में बंद सभी विदेशी नागरिकों को 28 सितंबर तक एक अस्थायी निरुद्ध केंद्र में स्थानांतरित किया जाए। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगदोह की खंडपीठ ने सोमवार को उन विदेशी नागरिकों की हिरासत से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।
राज्य सरकार की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, करीब 30 विदेशी नागरिक अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन अब भी हिरासत में हैं।
अदालत ने इस बात पर गौर किया कि सरकार ने लैतुमखरा, शिलॉन्ग स्थित एमबीओएसई छात्रावास को अस्थायी निरुद्ध केंद्र के रूप में चिह्नित किया है। इससे पहले अदालत ने इस उद्देश्य के लिए नोंगस्टोइन में एक भवन के इस्तेमाल के प्रस्ताव पर असंतोष जताया था।
रिपोर्ट के अनुसार, तीन मंजिला इस छात्रावास में छह शयनकक्ष में करीब 60 बिस्तर हैं और इसे वर्तमान में हिरासत में रखे गए विदेशी नागरिकों के लिए पर्याप्त माना गया है। केंद्र में पर्याप्त सुरक्षा एवं प्रशासनिक कर्मी, चिकित्सा कर्मचारी, सीसीटीवी कैमरे और अग्नि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होंगे।
अदालत ने निर्देश दिया कि विदेशी नागरिकों को जल्द से जल्द और किसी भी स्थिति में 28 सितंबर तक इस केंद्र में स्थानांतरित किया जाए।
कोलकाता की विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (एफआरआरओ) निधि रानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालत को बताया कि चार मामलों में निर्वासन के आदेश जारी किए जा चुके हैं और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने कहा कि सजा पूरी कर चुके लेकिन अब भी जेल में बंद अन्य विदेशी नागरिकों के मामलों में भी उचित कदम उठाए जाएंगे।
अदालत को बताया गया कि दो कैदी म्यांमा, दो नाइजीरिया और एक बांग्लादेश का नागरिक है, जो पांच साल से अधिक समय से हिरासत में है।
खंडपीठ ने राज्य सरकार और एफआरआरओ से यह भी जानकारी मांगी कि सजा पूरी होने के बावजूद हिरासत में रखे गए विदेशी नागरिकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया क्या होगी।
मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को उस दिन व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
भाषा गोला सिम्मी
सिम्मी