मेघालय : एशिया के सबसे स्वच्छ गांव मावलिननॉन्ग में मिली जुगनू की नयी प्रजातियां
मेघालय : एशिया के सबसे स्वच्छ गांव मावलिननॉन्ग में मिली जुगनू की नयी प्रजातियां
शिलांग, एक मई (भाषा)एशिया के सबसे स्वच्छ गांव के रूप में ख्याति प्राप्त मेघालय के मावलिननॉन्ग के साथ एक और खासियत जुड़ गई है। यहां पर अनुसंधानकर्ताओं ने जुगनू की नयी प्रजातियों की खोज की है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में मेघालय के पहले वैज्ञानिक रूप से दर्ज किए गए चमकदार कीड़ों का दस्तावेजीकरण किया है।
अधिकारियों ने बताया कि असम के डॉन बॉस्को विश्वविद्यालय की एम्मा मैग्डलीन नोंगलांग के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में पूर्व में अज्ञात दो प्रजातियों, डायफेन्स मेघालयनस और डायफेन्स मावलिननॉन्ग की पहचान की गई है, जिनमें से बाद वाली प्रजाति का नाम उस गांव के नाम पर रखा गया है, जहां इसे पहली बार दर्ज किया गया था।
उन्होंने बताया कि जहां एक ओर राज्य में कई क्षेत्रों में डायफेन्स मेघालयनस पाई गई, वहीं डायफेन्स मावलिननॉन्ग को भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट मावलिननॉन्ग गांव के घने जंगलों में देखा गया।
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि जुगनू अपेक्षाकृत उन इलाकों में पाए गए जहां हस्तक्षेप अपेक्षाकृत नहीं है, जिनमें अर्ध-सदाबहार वन और झरनों के पास बांस के झुरमुट शामिल हैं। इन इलाकों में मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम है और कृत्रिम प्रकाश का स्तर बहुत कम है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र का अवलोकन करने पर जानकारी मिली की कि डायफेन्स मेघालयनस 18-20 डिग्री सेल्सियस की ठंडी, आर्द्र परिस्थितियों में रहते हैं, और नर जमीन से 10-15 मीटर की ऊंचाई पर उड़ते समय हल्के हरे रंग की रोशनी उत्सर्जित करते हैं।
अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक इसके विपरीत,डायफेन्स मावलिननॉन्ग घने वन क्षेत्रों में पाए गए। उन्होंने बताया कि नर जुगनू अधिक ऊंचाई पर उड़ते हैं, जबकि पंखहीन मादाएं चट्टानों के नीचे पाई गईं, जिससे धीमी और लंबे समय तक रहने वाली रोशनी उत्पन्न होती है।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले मेघालय से जुगनुओं के कोई प्रकाशित रिकॉर्ड या संग्रहालय नमूने मौजूद नहीं थे।
नोंगलांग ने कहा कि जुगनु प्रकाश प्रदूषण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक अंधेरा कम होने पर अक्सर उनकी संख्या में गिरावट आती है।
सह-अनुसंधानकर्ता जेन वानरी शांगप्लियांग ने कहा कि जुगनू पर्यावरण के स्वास्थ्य और पारिस्थितिक संतुलन के प्रमुख संकेतक के रूप में कार्य करते हैं।
अनुसंधान दल का मानना है कि मेघालय की विविध स्थलाकृति और ऊंचाई में अंतर के कारण जुगनू प्रजातियों की एक समृद्ध लेकिन काफी हद तक अज्ञात विविधता मौजूद हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह खोज भविष्य में वैज्ञानिक सर्वेक्षणों की आवश्यकता को उजागर करती है।
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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