कश्मीर में मस्जिदों की जानकारी जुटाना मुसलमानों के धार्मिक मामलों में दखलंदाजी: महबूबा
कश्मीर में मस्जिदों की जानकारी जुटाना मुसलमानों के धार्मिक मामलों में दखलंदाजी: महबूबा
श्रीनगर, 14 जनवरी (भाषा) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को कहा कि कश्मीर में मस्जिदों और इमामों की जानकारी जुटाना मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी जुटाने की जरूरत है, तो इसकी शुरुआत देश भर के मंदिरों से होनी चाहिए।
मुफ्ती ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘मस्जिदों के लिए जारी किया गया नवीनतम आदेश हमारे धार्मिक मामलों में दखलअंदाजी है। अगर उन्हें ऐसा करना ही है, तो उन्हें अन्य धर्मों से शुरुआत करनी चाहिए। उन्हें मंदिरों में पुजारियों के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए, और यह पता लगाना चाहिए कि शूद्र किस मंदिर में जा सकते हैं और ब्राह्मण किस मंदिर में जा सकते हैं।’’
पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारियों को मंदिरों में प्रवेश के लिए भुगतान की जाने वाली धनराशि के बारे में भी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस के पास जम्मू-कश्मीर में मस्जिदों की संख्या और उनकी जमीन का रिकॉर्ड पहले से ही मौजूद है, लेकिन अब, मौलवियों, इमामों का विवरण, उनकी तस्वीरें, आधार कार्ड मांगना और इस तरह की जानकारी जुटाना जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों को डराने और उन्हें उनके मजहब से दूर रखने का एक प्रयास है।’’
महबूबा ने कहा कि मस्जिदों के इमाम और प्रबंधन समितियां इस तरह से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया से भयभीत हैं।
उन्होंने कहा, ‘यह पांच पन्नों का प्रपत्र इस तरह बनाया गया है कि ऐसा लगता है कि वे इमाम, मौलवी, शिक्षक या मस्जिद समितियों के सदस्य नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर ओजीडब्ल्यू(आतंकवादियों के मददगार) हैं। जिस तरह ओजीडब्ल्यू को थाने में परेशान किया जाता है और उनसे सारी जानकारी मांगी जाती है, ठीक उसी तरह मस्जिदों से जानकारी मांगी जा रही है, मानो वे अपराध स्थल हों।’
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को गुरुद्वारों और गिरजाघरों से भी इसी तरह की जानकारी जुटाने की चुनौती दी।
महबूबा ने कहा कि उन्हें डर है कि सरकार देश भर की मस्जिदों से भी इसी तरह की जानकारी जुटा सकती है।
पीडीपी प्रमुख ने कहा, ‘‘पहले उन्होंने वक़्फ की संपत्तियों पर हाथ डाला, और अब वे उन मस्जिदों पर भी हाथ डालना चाहते हैं जो वक़्फ़ की संपत्ति नहीं हैं। वे अब अलग-अलग मज़हबी फ़िरक़ों (संप्रदायों) की जानकारी भी मांग रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जिन फिरकों से हम जुड़े हैं, उनसे उनका क्या लेना-देना? मस्जिदें सभी के लिए खुली हैं, चाहे वे किसी भी फिरकों के हों। ऐसा नहीं है कि दलितों को प्रवेश की अनुमति नहीं है।’
पीडीपी अध्यक्ष ने पांच सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी के बारे में कहा कि लोगों को केवल आरोपों के आधार पर गिरफ्तार किया जाता है या नौकरी से निकाल दिया जाता है।
उन्होंने पूछा, ‘‘क्या किसी अदालत या जांच में यह साबित हुआ है? क्या उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका मिला? यह सब क्या है? मुसलमानों के प्रति उनके मन में कितनी नफरत है?’’
कुछ भाजपा नेताओं द्वारा अलग जम्मू राज्य की मांग के बारे में पूछे जाने पर, महबूबा ने कहा कि अगर यह मांग पूरी हो जाती है तो सबसे ज्यादा नुकसान उन्हें (जम्मूवासियों को) ही उठाना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘जब 2019 में दरबार स्थानांतरण को निलंबित किया गया, तो वे बेचैन हो गए। जब वे जम्मू के लिए अलग राज्य की मांग करेंगे, तो सबसे ज्यादा नुकसान जम्मू को ही होगा।’’
सिंधु जल संधि पर अब्दुल्ला के बयान पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर भाजपा की राह पर चलना चाहते हैं।
मुफ्ती ने कहा, ‘‘पानी का दुरुपयोग मानवता के विरुद्ध है। मेरा मानना है कि किसी भी देश में पानी का प्रवाह रोकना मानवता के विरुद्ध है। उमर भाजपा की ही राह पर चलना चाहते हैं।’’
भाषा नोमान सुरेश
सुरेश

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