जीवनशैली में मामूली सुधार जीवनकाल को बढ़ा सकते है: अध्ययन

जीवनशैली में मामूली सुधार जीवनकाल को बढ़ा सकते है: अध्ययन

जीवनशैली में मामूली सुधार जीवनकाल को बढ़ा सकते है: अध्ययन
Modified Date: January 14, 2026 / 05:42 pm IST
Published Date: January 14, 2026 5:42 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) शारीरिक गतिविधि, नींद और आहार में मामूली सुधार भी जीवनकाल को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अध्ययनों से यह जानकारी मिलीं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, रोजाना दो से पांच मिनट तेज गति से पैदल चलने, नींद में कुछ मिनट की बढ़ोतरी और आहार में मामूली सुधार से जीवनकाल को बढ़ाने की एक व्यावहारिक शुरुआत हो सकती है।

द लांसेट की ईक्लिनिकलमेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन के मुताबिक, रोजाना पांच मिनट अधिक नींद, दो मिनट तेज गति से पैदल चलना और प्रचुर मात्रा में सब्जियां के सेवन से उन लोगों के जीवन में करीब एक साल की बढ़ोतरी हो सकती है, जिनकी नींद, शारीरिक गतिविधि और आहार की आदतें सबसे खराब श्रेणी में आती हैं।

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ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और चिली के शोधकर्ताओं की अंतरराष्ट्रीय टीम ने कहा कि जब नींद, शारीरिक गतिविधि और आहार में छोटे सुधारों को एक साथ अपनाया जाता है, तो इनका संयुक्त प्रभाव जीवनकाल पर सार्थक असर डालता है।

अध्ययन में खराब जीवनशैली का अर्थ रोजाना औसतन साढ़े पांच घंटे की नींद, 10 मिनट से कम शारीरिक गतिविधि और खराब आहार गुणवत्ता को माना गया है।

वहीं, सबसे बेहतर संयोजन—रोजाना सात से आठ घंटे की नींद, कम से कम 40 मिनट मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ आहार—नौ साल से अधिक अतिरिक्त जीवनकाल और अच्छे स्वास्थ्य में बिताए गए वर्षों से जुड़ा पाया गया।

शोधकर्ताओं ने कहा कि नींद, शारीरिक गतिविधि और आहार का संयुक्त प्रभाव, इनके अलग-अलग प्रभावों के योग से कहीं अधिक है। उदाहरण के तौर पर, केवल नींद के माध्यम से जीवनकाल को एक साल तक बढ़ाने के लिए अस्वस्थ आदतों वाले व्यक्ति को रोजाना 25 मिनट अतिरिक्त सोना होगा, जबकि यदि शारीरिक गतिविधि और आहार में भी थोड़ा सुधार किया जाए तो यह लक्ष्य और जल्दी हासिल किया जा सकता है।

शोध में करीब 60,000 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिन्हें 2006 से 2010 के बीच यूके बायोबैंक में शामिल किया गया था और लगभग आठ वर्षों तक उनका अनुसरण किया गया। इनमें से एक उप-समूह ने 2013 से 2015 के बीच सात दिनों तक कलाई में पहनने वाले उपकरणों के जरिए अपनी शारीरिक गतिविधि दर्ज की।

द लांसेट में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि रोजाना पांच मिनट की अतिरिक्त मध्यम शारीरिक गतिविधि (जैसे पांच किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलना) अधिकांश वयस्कों में मौत के जोखिम को 10 प्रतिशत तक और सबसे कम सक्रिय लोगों में छह प्रतिशत तक घटा सकती है।

इसी तरह, रोजाना 30 मिनट तक निष्क्रिय समय घटाने से कुल मौतों की संख्या में सात प्रतिशत की कमी देखी गई, जबकि एक घंटे की कमी से यह आंकड़ा 13 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि ये निष्कर्ष स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं और पूरी आबादी के लिए लाभ दर्शाते हैं। हालांकि, इन्हें किसी व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत सलाह या व्यायाम की सिफारिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

भाषा राखी नरेश

नरेश


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