वजन घटाने वाली जीएलपी-1 दवाओं की अनधिकृत बिक्री के खिलाफ निगरानी जारी रहेगी : सरकार

वजन घटाने वाली जीएलपी-1 दवाओं की अनधिकृत बिक्री के खिलाफ निगरानी जारी रहेगी : सरकार

वजन घटाने वाली जीएलपी-1 दवाओं की अनधिकृत बिक्री के खिलाफ निगरानी जारी रहेगी : सरकार
Modified Date: April 1, 2026 / 07:07 pm IST
Published Date: April 1, 2026 7:07 pm IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) सरकार ने बुधवार को कहा कि ‘जीएलपी-1’ आधारित वजन घटाने वाली दवाएं टाइप-2 मधुमेह और मोटापे के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं हैं, लेकिन इनके गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं और इन्हें केवल एक चिकित्सा विशेषज्ञ की देखरेख में ही लिया जाना चाहिए।

सरकार ने कहा कि ये दवाएं डॉक्टर के पर्चे पर ही प्राप्त की जा सकती हैं।

सरकार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि हाल ही में भारतीय बाजार में जीएलपी-1 दवाओं के कई प्रकार पेश किए गए हैं और खुदरा फार्मेसी, ऑनलाइन मंचों, थोक विक्रेताओं और स्वास्थ्य क्लीनिकों के माध्यम से इनकी आसानी से उपलब्धता को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

उसने कहा कि केन्द्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इनकी अनधिकृत बिक्री और प्रचार के खिलाफ अपनी नियामक निगरानी तेज कर दी है और चेतावनी दी कि आने वाले हफ्तों में कड़ी जांच और निगरानी जारी रहेगी।

सरकार ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को लाइसेंस रद्द होने, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

जीएलपी-1 दवाएं (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट) ऐसी औषधियां हैं, जिन्हें हार्मोन असंतुलन को ठीक करके टाइप-2 मधुमेह और मोटापे दोनों के उपचार के लिए विकसित किया गया है। ये दवाएं इंसुलिन के स्राव को उत्तेजित करती हैं और अतिरिक्त ग्लूकागन को दबाती हैं, जिससे ब्लड शुगर को फिर से नियंत्रण में लाया जा सके।

ये दवाएं ब्लड शुगर और भूख को नियंत्रित करती हैं और इनका उपयोग मोटापे के इलाज के लिए भी किया जाता है। ये दवाएं ‘गैस्ट्रिक एम्पटीइंग’ यानी पेट के खाली होने की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं, जिससे पेट भरे होने का अहसास बढ़ जाता है। इससे व्यक्ति की भूख में कमी आती है और परिणामस्वरूप उनके वजन को घटाने में मदद मिलती है।

अनधिकृत बिक्री और अनियंत्रित उपयोग को रोकने के लिए सीडीएससीओ ने अपनी नियामक निगरानी को तेज कर दिया है और चेतावनी दी है कि यदि इन दवाओं का सेवन सख्त चिकित्सा निगरानी के तहत नहीं किया जाता है तो गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

भाषा शफीक देवेंद्र

देवेंद्र


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