सांसद असहमत हो सकते हैं, लेकिन जनता के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता अनिवार्य: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

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सांसद असहमत हो सकते हैं, लेकिन जनता के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता अनिवार्य: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

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  • Publish Date - July 26, 2026 / 12:36 AM IST,
    Updated On - July 26, 2026 / 12:36 AM IST

नयी दिल्ली, 25 जुलाई (भाषा) राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि सदन जहां अलग-अलग क्षेत्रीय आवाजों को एक साथ लाता है, वहीं सदस्य राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए सदन में एकजुट होते हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा पीढ़ी के सांसदों को युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए तरक्की को बढ़ावा देकर और उनके लिए अवसर बढ़ाकर 2047 तक “विकसित भारत” के दृष्टिकोण को पूरा करने का ऐतिहासिक मौका मिला है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि चुनाव मतों से जीते जाते हैं, लेकिन सम्मान जनसेवा से मिलता है।

नए सदस्यों के लिए दो दिन के प्रबोधन कार्यक्रम ‘प्रारंभ’ का उद्घाटन करते हुए, राधाकृष्णन ने उनसे आग्रह किया कि वे यह याद रखें कि सदन में पूछा गया हर सवाल, बनाया गया हर कानून, तैयार की गई हर नीति और की गई हर बहस में लोगों के जीवन को बदलने की क्षमता होती है।

उन्होंने कहा, “जहां सदन विभिन्न क्षेत्रों की विविध आवाजों को एक मंच पर लाता है, वहीं सदस्य राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए सदन के पटल पर एकजुट होते हैं।”

उन्होंने कहा, “हमें एक दस्तावेज-संविधान; एक दृष्टि-राष्ट्र प्रथम; और एक लक्ष्य-विकसित भारत 2047-एकजुट करता है।”

राधाकृष्णन ने कहा कि सांसदों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जनता और संविधान के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता होनी चाहिए, क्योंकि संविधान ही सभी के लिए साझा नैतिक मार्गदर्शक है।

भाषा प्रशांत आशीष

आशीष