आरजी कर पीड़िता की मां के चुनाव लड़ने से न्याय की मेरी मांग प्रभावित नहीं होगी : माकपा नेता दिप्सिता
आरजी कर पीड़िता की मां के चुनाव लड़ने से न्याय की मेरी मांग प्रभावित नहीं होगी : माकपा नेता दिप्सिता
(सौगत मुखोपाध्याय)
कोलकाता, 24 मार्च (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की युवा नेता दिप्सिता धर आरजी कर अस्पताल में बलात्कार-हत्या की पीड़िता की मां के भाजपा टिकट पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा से निराश हैं, लेकिन उनका कहना है कि चुनाव से उनका भावनात्मक जुड़ाव अब भी पीड़िता के लिए न्याय के मुद्दे पर केंद्रित है।
कोलकाता के बाहरी इलाके में स्थित दमदम उत्तर सीट से 32-वर्षीय वामपंथी उम्मीदवार ने कहा कि उनका चुनावी मुद्दा राज्य की उन सभी महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई से जुड़ा है, जो लिंग आधारित हिंसा का शिकार होती रहती हैं।
तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार एवं मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को चुनौती दे रहीं धर ने कहा कि चुनावों ने उन्हें आरजी कर की पीड़िता ‘अभया’ के लिए न्याय मांगने का एक और अवसर प्रदान किया है। राज्य के लाखों प्रदर्शनकारियों द्वारा पीड़िता को ‘अभया’ उपनाम दिया गया था।
उनका विधानसभा क्षेत्र उत्तर 24 परगना जिले के पनिहाटी निर्वाचन क्षेत्र से सटा हुआ है, जहां पीड़िता का घर है। आरजी कर की घटना ने लगभग एक साल पहले राज्य को झकझोर दिया था।
भाजपा ने अभी तक पीड़िता की मां की उम्मीदवारी की न तो पुष्टि की है और न ही इसे अस्वीकार किया है।
वामपंथी उम्मीदवार धर ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मेरे लिए यह चुनाव पहले दिन से ही भावनात्मक है, क्योंकि मेरे निर्वाचन क्षेत्र के ठीक बगल में एक युवती रहती थी, जो डॉक्टर बनना चाहती थी, जिसके सपने बेरहमी से कुचल दिए गए। सड़कों पर भारी आक्रोश के बावजूद, न्याय नहीं मिला। जांच दिखावा थी और असली अपराधी अब भी आज़ाद घूम रहे हैं।’’
धर ने कहा कि इन चुनावों के प्रति उनकी भावनाओं में या ‘अभया’ के लिए न्याय की उनकी मुहिम में कोई बदलाव नहीं आया है, भले ही पीड़िता की मां ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर चुनाव लड़ने के अपने इरादे की घोषणा कर दी हो।
माकपा नेता ने कहा, ‘‘मेरे लिए, यह चुनाव इस मांग को सामने रखने का है कि बंगाल की महिलाएं कोई ऐसी वस्तु नहीं हैं, जिन्हें इच्छानुसार बलात्कार या हत्या का शिकार बनाया जा सके।”
हालांकि, उन्होंने पीड़िता के माता-पिता के इस दावे का खंडन किया कि वामपंथियों ने ‘अभया’ के मामले का इस्तेमाल अपने राजनीतिक लाभ के लिए किया।
धर ने पीड़िता की मां द्वारा पार्टी के चयन पर अफसोस जताते हुए कहा, ‘‘मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है। यह उनका अधिकार है। लेकिन मैं यह कहना चाहूंगी: माकपा ने पीड़ित परिवार का साथ दिया या न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर प्रदर्शन किया, यह सब चुनावी लाभ के लिए नहीं था।’’
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा और शोधकर्ता धर ने 2021 के चुनावों में बाली से माकपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली।
उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया ने लोगों के वास्तविक मुद्दों, जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में गिरावट, खराब नागरिक अवसंरचना, बेरोजगारी को नजरअंदाज कर दिया है।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की मुखर आलोचक धर ने दावा किया कि मुख्यमंत्री द्वारा मतदाता सूची संशोधन का विरोध महज ‘‘दिखावा’’ था।
धर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती पिछले चुनावों में भाजपा को गए वोटों को अपनी झोली में डालना और राज्य विधानसभा में अपनी राजनीतिक पकड़ को दोबारा स्थापित करना है।
भाषा आशीष सुरेश
सुरेश

Facebook


