नेशनल कांफ्रेंस ने धारा 370 को हटाने के फैसले को वापस लेने की मांग की
नेशनल कांफ्रेंस ने धारा 370 को हटाने के फैसले को वापस लेने की मांग की
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) सदस्य सज्जाद अहमद किचलू ने संविधान की धारा 370 को हटाने के फैसले को वापस लेने की मांग की और कहा कि एकीकृत जम्मू कश्मीर की बात की जा रही थी लेकिन सरकार ने मौजूदा जम्मू कश्मीर को ही विभाजित कर दिया।
नेकां सदस्य ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार एकीकृत जम्मू कश्मीर की बात कर रही थी लेकिन उसने इसे ही बांट दिया। उन्होंने सवाल किया कि पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर) वापस लाने का एजेंडा था तो सरकार उस दिशा में क्या काम कर रही है।
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में शामिल होते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में बाढ़ के कारण कई लोगों की जान चली गई लेकिन राष्ट्रपति अभिभाषण में उसका कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर के व्यापारियों, छात्रों के साथ देश के अन्य हिस्सों में दुर्व्यवहार किया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए दूसरे राज्यों में कोई जगह नहीं है।
कांग्रेस की रंजीत रंजन ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते की जानकारी सदन को दी जानी चाहिए। उनहोंने कहा कि सरकार को इस संबंध में सदन को और विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए और उसे विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि सरकार शुतुरमुर्ग की तरह आचरण कर रही है और वह जमीनी सचाई को स्वीकार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार आत्मसंतोष की मुद्रा में रहती है।
मनरेगा की जगह नया कानून लाए जाने का विरोध करते हुए कांग्रेस सदस्य ने कहा कि दावा किया जा रहा है कि देश में जो भी प्रगति हुई है, वह पिछले 11 साल में ही हुई है।
उन्होंने कहा कि युवाओं के सामने नौकरियों की कमी है वहीं श्रमिकों खासकर असंगठित क्षेत्र के कामगारों के अधिकार छीने जा रहे हैं और उनके हक मारे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार को फिर से परिभाषित कर रही है।
हिमालय क्षेत्र में अत्यधिक निर्माण कार्य होने का जिक्र करते हुए रंजन ने कहा कि इस वजह से मानव निर्मित आपदाएं सामने आ रही हैं और व्यापक नुकसान हो रहा है।
भाजपा के रामचंद जांगडा ने दावा किया कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता अपने ही देश को नुकसान पहुंचाने वाला था और वैसे समझौते से बचना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय लाहौर के लोगों को अंत तक यह भरोसा दिया जाता रहा कि वह भारत के साथ ही रहेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बड़ी संख्या में लोगों को भारी संकट का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के देश से विदा होने के साथ ही अंग्रेजी भाषा की भी विदाई होनी थी लेकिन उस समय 15 साल की छूट दी गयी। 15 साल पूरा होने के बाद इस संबंध में एक कानून बना दिया गया।
भाजपा सदस्य ने कहा कि भारत में धर्म के नाम पर कोई द्वेष नहीं है और सभी धर्मों के कलाकारों को देश में एक जैसी लोकप्रियता मिलती रही है। उन्होंने कहा कि देशवासी हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के कलाकारों को एक समान प्रेम देते रहे है।
उन्होंने कहा कि देश ने बहुत त्रासदियां झेली हैं और अब यह विकास के रास्ते पर है। उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है और युवाओं के हाथ में कौशल होना चाहिए।
शिवसेना सदस्य मिलिंद देवड़ा ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा होने के बाद स्टॉक बाजार में तीन प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि स्पष्ट करता है कि समझौता सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अधिकतर बड़े देश भारत के साथ व्यापार समझौता करना चाहते हैं।
भाषा अविनाश माधव
माधव

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