सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्र की इच्छाशक्ति सैन्य शक्ति जितनी ही महत्वपूर्ण : एनएसए डोभाल

सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्र की इच्छाशक्ति सैन्य शक्ति जितनी ही महत्वपूर्ण : एनएसए डोभाल

सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्र की इच्छाशक्ति सैन्य शक्ति जितनी ही महत्वपूर्ण : एनएसए डोभाल
Modified Date: April 14, 2026 / 08:24 pm IST
Published Date: April 14, 2026 8:24 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

गांधीनगर, 14 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा को एक जटिल और बहुआयामी मुद्दा बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी राष्ट्र की शक्ति का आकलन करते समय उसके लोगों की इच्छाशक्ति को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती है।

डोभाल ने गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) के पांचवें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हालांकि सैन्य शक्ति जैसे कारक अहम हैं, लेकिन सुरक्षा मामलों में अक्सर लोगों की अंतर्निहित शक्ति ही निर्णायक साबित होती है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा पूरे राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी है।

डोभाल ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा एक व्यापक, जटिल और बहुआयामी मुद्दा है। इसमें कई घटक शामिल हैं : किसी राष्ट्र की सैन्य शक्ति, तकनीकी दक्षता, प्राकृतिक संसाधन, कूटनीतिक क्षमता और मानव पूंजी।”

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस व्यापक राष्ट्रीय शक्ति का आकलन करते समय राष्ट्र की इच्छाशक्ति और उसके लोगों की अंतर्निहित शक्ति का अंदाजा लगाने में अक्सर गलतियां होती हैं।

डोभाल ने इसे समझाने के लिए वैश्विक घटनाक्रमों के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा, “अगर रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) अफगानिस्तान से (1988-89 में) पीछे हट गया या अगर अमेरिका को वियतनाम से (1970 के दशक में) पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा या अगर अमेरिका अफगानिस्तान में अपने उद्देश्यों को हासिल करने में नाकाम रहा- तो यह सैन्य शक्ति या प्रौद्योगिकी की कमी के कारण नहीं था, बल्कि निर्णायक कारक स्थानीय लोगों का जज्बा एवं प्रतिबद्धता थी, जिसे हम राष्ट्र की इच्छाशक्ति भी कहते हैं।”

एनएसए ने कहा कि युद्ध का एकमात्र मकसद दुश्मन का मनोबल तोड़ना है, ताकि उन्हें आपकी शर्तों पर समझौता स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा सके।

उन्होंने कहा कि इस शक्ति के निर्माण में नागरिकों की भूमिका बेहद अहम है।

डोभाल ने कहा, “इस इच्छाशक्ति के विकास में आम जनता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, खासतौर पर अपनी सुरक्षा के प्रति उनकी जागरूकता का स्तर।”

उन्होंने कहा कि भारत इस सिलसिले में एक बदलाव का गवाह बन रहा है।

डोभाल ने कहा, “आज, हमारे इतिहास में एक लंबे अंतराल के बाद, हम एक नयी जागृति देख रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा पूरे राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह केवल सशस्त्र बलों, पुलिस या खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है- यह आप सभी की संयुक्त शक्ति है, जो अंततः हमारे राष्ट्रीय मनोबल का निर्माण करती है।”

एनएसए ने शिक्षा, अनुसंधान और परिचालन सहित पूरे सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में पेशेवरों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता एवं जागरूकता नतीजों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है।

डोभाल ने इस क्षेत्र में चरित्र और अनुशासन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “मानसिक शक्ति” और एक टीम के रूप में काम करने की क्षमता उत्कृष्टता हासिल करने के लिए आवश्यक गुण हैं।

प्रतिबद्धता को “तीसरा अपरिहार्य तत्व” बताते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उच्चतम स्तर की निष्ठा की जरूरत होती है।

सुरक्षा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा, “यह एक ऐसा खेल है, जिसमें कोई रजत पदक नहीं मिलता। या तो आप विजयी होते हैं या पराजित। अगर आप जीतते हैं, तो आप इतिहास रचते हैं; लेकिन अगर आप हारते हैं, तो आप इतिहास बन जाते हैं। आपका अस्तित्व ही दांव पर लगा होगा।”

दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रीय सुरक्षा में डोभाल के योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया।

डोभाल ने कहा, “आज मुझे प्रदान की गई डॉक्टरेट की मानद उपाधि को मैं बेहद विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। मैं इस सम्मान के लिए बेहद आभारी हूं।”

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश


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