एनसीईआरटी ने अपनी पाठ्यपुस्तकों के अनधिकृत संस्करणों को लेकर चेतावनी दी
एनसीईआरटी ने अपनी पाठ्यपुस्तकों के अनधिकृत संस्करणों को लेकर चेतावनी दी
नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने बुधवार को छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को अपनी पाठ्यपुस्तकों के ‘पायरेटेड’ और अनधिकृत संस्करणों के प्रति आगाह किया और कहा कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग मंच पर नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की एक फर्जी किताब प्रसारित की जा रही है।
परिषद ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक बयान में कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि उसकी कुछ पाठ्यपुस्तकों की पायरेटेड और अनधिकृत प्रतियां मुद्रित और डिजिटल, दोनों ही रूपों में वितरीत की जा रही हैं। कुछ मामलों में तो ये प्रतियां परिषद द्वारा उनके आधिकारिक प्रकाशन और जारी किए जाने से पहले ही वितरीत की जा रही हैं।’’
बयान में कहा गया, ‘‘यह भी देखा गया है कि सोशल मीडिया चैनलों, वेबसाइट और मैसेजिंग ग्रुप्स पर नौवीं कक्षा की समाज विज्ञान की किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉण्ड’ (भाग प्रथम) की एक नकली और अनधिकृत प्रति प्रसारित की जा रही है। ये मंच एनसीईआरटी की किताबें और उससे जुड़ी सामग्री देने का दावा करते हैं और इस तरह की नकली और अनधिकृत सामग्री प्रसारित कर रहे हैं।’’
परिषद ने कहा कि इन चैनल का ‘‘एनसीईआरटी से कोई संबंध नहीं है या उन्हें कोई मान्यता प्राप्त नहीं है’’।
आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें केवल उसके आधिकारिक माध्यमों से ही प्रकाशित, मुद्रित और जारी की जाती हैं और आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले किसी भी रूप में इनके वितरण के लिए कोई पाठ्यपुस्तक अधिकृत नहीं है।
इसमें कहा गया है कि ऐसे अनधिकृत स्रोतों से प्रसारित की जा रही जानकारी गलत, अधूरी, उसमें छेड़छाड़ की गई या पूरी तरह से मनगढ़ंत हो सकती है, और छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों या आम जनता को उसपर भरोसा नहीं करना चाहिए।
एनसीईआरटी ने सभी पक्षकारों को सलाह दी है कि वे किताबें केवल अधिकृत स्रोतों से ही खरीदें। उसने बताया कि मुद्रित प्रति के लिए अधिकृत विक्रेताओं के अलावा, पाठ्यपुस्तकों की डिजिटल प्रति उसकी आधिकारिक वेबसाइट और ई-पाठशाला पोर्टल पर मुफ्त में उपलब्ध हैं।
परिषद ने लोगों से अपील की कि वे ऐसे अनधिकृत या अप्रमाणिक सोशल मीडिया चैनल, लिंक या ऐप्लिकेशन को सब्सक्राइब न करें, न ही उन्हें साझा करें और न ही उनपर भरोसा करें, जो एनसीईआरटी की किताबें या प्रकाशित करने से पहले की सामग्री उपलब्ध कराने का दावा करते हैं।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश

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