नीट प्रदर्शन: न्यायालय ने पुलिस ज्यादतियों के आरोपों की जांच के लिये समिति गठित की

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नीट प्रदर्शन: न्यायालय ने पुलिस ज्यादतियों के आरोपों की जांच के लिये समिति गठित की

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  • Publish Date - August 20, 2026 / 07:07 PM IST,
    Updated On - August 20, 2026 / 07:07 PM IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया, जो हाल में राष्ट्रीय राजधानी में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई हिंसा के आरोपों की जांच करेगी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि इस समिति में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एल. आर. बिश्नोई भी शामिल हैं।

समिति से कहा गया है कि वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल समेत अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच करे। साथ ही, समिति को प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस अधिकारियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कथित हिंसा की भी जांच करने को कहा गया है।

पीठ ने कहा, ‘‘इस एचपीईसी (उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति) का गठन कई तरह के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है जिनमें समिति के हर सदस्य की अपनी विशेषज्ञता और अनुभव के साथ-साथ समिति की विविधता और अन्य कारक भी शामिल हैं।

न्यायालय ने 18 अगस्त को दिये आदेश में कहा, “हमें पूरा भरोसा है कि एचपीईसी की सिफारिशें इस अदालत के लिए बहुत मददगार साबित होंगी और समिति उन सभी मुद्दों का व्यापक आकलन करेगी, जिन पर गंभीरता से विचार किये जाने की जरूरत है।”

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि एचपीईसी द्वारा की जाने वाली जांच केवल एक बार की जाने वाली कवायद नहीं होगी।

उसने समिति से कहा कि वह मामले से जुड़े मुद्दों का लगातार और समय-समय पर आकलन करती रहे तथा अपनी अंतरिम रिपोर्ट भी समय-समय पर प्रस्तुत करे।

उच्चतम न्यायालय ने सिफारिश की कि एचपीईसी को कुछ मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान देना चाहिए और इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ की घटनाओं से संबंधित है।

इसने कहा कि एचपीईसी दोनों पक्षों में घायल हुए लोगों- चाहे वे पुलिसकर्मी हों या प्रदर्शनकारी—को अंतरिम मुआवजा देने से जुड़े मुद्दों पर भी विचार कर सकती है।

उच्चतम न्यायालय ने एचपीईसी से यह भी कहा कि वह प्रदर्शनकारियों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

इसमें सरकारी प्रतिष्ठानों, वाहनों और सरकार के साथ-साथ निजी नागरिकों की अन्य संपत्तियों को हुई क्षति और नुकसान भी शामिल है।

उच्चतम न्यायालय ने सभी पक्षों को एचपीईसी के समक्ष जाने और अपनी ओर से उचित समझी जाने वाली प्रासंगिक सामग्री, दस्तावेजी साक्ष्य और सुझाव प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी।

इसने कहा कि शिकायतकर्ताओं को अपनी शिकायतें, अभ्यावेदन और सामग्री गुप्त तरीके से प्रस्तुत करने की भी अनुमति दी गई है, ताकि शिकायतकर्ताओं और गवाहों की पहचान सुरक्षित रखी जा सके।

उच्चतम न्यायालय ने पक्षकारों के बीच बेहतर संवाद के लिए अधिवक्ताओं आशिमा मंडला, दक्ष कादियान और आस्था सिंह को नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया।

पीठ ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे छात्र प्रदर्शनों से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन फुटेज, बॉडी-वॉर्न कैमरा रिकॉर्डिंग, वीडियोग्राफी, वायरलेस संचार रिकॉर्ड और पीसीआर कॉल लॉग सुरक्षित रखें, पूरा रिकॉर्ड एचपीईसी को उपलब्ध कराएं और उसे हर संभव सहयोग प्रदान करें।

एचपीईसी के कामकाज से जुड़ी व्यवस्थाओं और तौर-तरीकों के संबंध में उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि समिति के अध्यक्ष को उच्चतम न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश के समान मानदेय, सुविधाएं और अन्य लाभ प्रदान किए जाएं।

न्यायालय का यह आदेश उन याचिकाओं पर आया, जिनमें कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए आंदोलन के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोप लगाए गए थे।

कॉजपा के आह्वान पर 20 जुलाई को दिल्ली में संसद की ओर मार्च निकाला गया था और इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई थीं। सुरक्षाकर्मियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया था।

प्रदर्शनकारी नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

जंतर-मंतर पर 20 जून को शुरू हुआ यह आंदोलन 25 जुलाई को तब समाप्त हुआ था, जब प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था और सरकार ने कॉजपा की अन्य मांगों को स्वीकार कर लिया था।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश