नीट-यूजी 2027 : छह दिनों में करीब एक हजार केंद्रों पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की योजना

नीट-यूजी 2027 : छह दिनों में करीब एक हजार केंद्रों पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की योजना

नीट-यूजी 2027 : छह दिनों में करीब एक हजार केंद्रों पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा कराने की योजना
Modified Date: July 8, 2026 / 06:04 pm IST
Published Date: July 8, 2026 6:04 pm IST

नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) चिकित्सा के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अगले साल राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) कंप्यूटर आधारित होगी और इसे छह दिनों में करीब एक हजार केंद्रों पर आयोजित करने की योजना है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

किसी भी स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए नीट सबसे बड़ी परीक्षा है और इसमें करीब 25 लाख अभ्यार्थी शामिल होते हैं।

प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की कि अगले साल से नीट पारंपरिक कागज-कलम के बजाय कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (सीबीटी) होगी।

सूत्रों ने बताया कि नीट-यूजी को पारंपरिक कागज-कलम या ऑनलाइन कराने को लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालयों के बीच कई वर्षों से विस्तृत विचार-विमर्श चल रहा है।

एक सूत्र ने बताया, ‘‘अभियांत्रिकी महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए होने वाले जेईई (संयुक्त इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा)की तरह ही, यह परीक्षा भी कम से कम छह दिनों तक चलेगी। परीक्षा केंद्रों का चुनाव उनकी विश्वसनीयता और वहां मौजूद आधारभूत संरचना की जांच-पड़ताल के बाद किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसकी विस्तृत योजना अभी तैयार की जा रही है।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए)हर साल चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए नीट आयोजित करती है। देश में एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) पाठ्यक्रम के लिए कुल 1,08,000 सीटें उपलब्ध हैं।

एमबीबीएस पाठ्यक्रम में उपलब्ध सीट में से लगभग 56,000 सीट राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों और करीब 52,000 सीट निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की हैं। दंत चिकित्सा, आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध जैसे स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए भी नीट के नतीजों का इस्तेमाल किया जाता है।

नीट को सीबीटी के आधार पर कराने का विचार नया नहीं है और इस पर पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है। हालांकि, परीक्षा में सुधार की मांग प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद उठी।

शिक्षा मंत्रालय ने जून 2024 में सुधारों के लिए सुझाव देने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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