नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला: पाठकों के बीच एआई ऑडियो बुक बूथ बना आकर्षण का केंद्र

नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला: पाठकों के बीच एआई ऑडियो बुक बूथ बना आकर्षण का केंद्र

नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला: पाठकों के बीच एआई ऑडियो बुक बूथ बना आकर्षण का केंद्र
Modified Date: January 14, 2026 / 03:41 pm IST
Published Date: January 14, 2026 3:41 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से युक्त ‘ऑडियोबुक बूथ’ हर उम्र के जिज्ञासु पाठकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है जहां वे अपनी पसंदीदा कहानियों के खुद से कथावाचक बन सकते हैं।

ऑनलाइन बुकस्टोर बुक्सवैगन इसके लिए पाठकों को ‘स्पॉटलाइट’ में आने और अपनी आवाज़ में ‘ऑडियोबुक्स’ सुनने का अनुभव करने का एक अनोखा मौका दे रहा है। इसमें पाठक एक बार में केवल एक अंश पढ़ सकता है।

पुस्तक मेले में पाठक अपनी आवाज़ का नमूना रिकॉर्ड करने के लिए लाइन में लग रहे हैं और वे अपनी पसंदीदा कहानियों के खुद वाचक बन रहे हैं। यहां मोबी-डिक या, द व्हेल और ‘किम’ जैसी कृतियों से लेकर ‘रामायण’ और ‘भगवद गीता’ जैसे हिंदू महाकाव्य तक शामिल हैं।

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इसकी प्रक्रिया आसान है: एक छोटा सा हिस्सा रिकॉर्ड करें और फिर बुक्सवैगन के प्लेटफॉर्म पर 100 से ज़्यादा शीर्षक में से चुनें, ताकि आप अपनी आवाज़ में ऑडियोबुक सुन सकें। बुक्सवैगन के संस्थापक शुभम जैन ने कहा, ‘‘सिर्फ़ 30 सेकंड का आवाज का नमूना ही काफ़ी है।’’

अभी यह फ़ीचर अपने ‘डेमो फ़ॉर्मेट’ में है, और उपयोगकर्ता को अपनी ‘क्लोन’ की हुई आवाज़ में पढ़े गए कुछ हिस्से सुनने की इजाज़त देता है।

जैन ने कहा कि इसका एक पूरी तरह से विकसित संस्करण अगले महीने तक आने की उम्मीद है जो सुनने वालों को अपनी आवाज़ में पूरी ऑडियोबुक सुनने का अनुभव देगा। इसका मतलब है कि अपनी आवाज़ में कहानियां सुनने के अलावा, सुनने वाले जल्द ही अपनी दादी को बच्चों की पंचतंत्र की कहानियां सुनाते हुए, माता-पिता को सोते समय कहानियां पढ़ते हुए, या किसी अपने की आवाज़ में पसंदीदा किताबों को एनिमेट करते हुए सुन सकते हैं ।

अपनी आवाज़ से कहानी को ज़िंदा होते देखने के लिए उत्सुक, 14 साल की छात्रा वर्षा पुंज ने कहा कि अपनी आवाज़ सुनना एक कमाल का अनुभव था — भले ही यह सिर्फ़ एक पैराग्राफ़ के लिए ही क्यों न हो।

उन्होंने आगे कहा, “यह देखना दिमाग घुमा देने वाला है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कुछ ही मिनटों में क्या कर सकता है। यह सच में एक अनोखा अनुभव था।”

भाषा नरेश नरेश पवनेश

पवनेश


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