आजादी के बाद से श्रमिकों के अधिकारों के लिए सबसे बड़ा झटका हैं नई श्रम संहिताएं: खरगे
आजादी के बाद से श्रमिकों के अधिकारों के लिए सबसे बड़ा झटका हैं नई श्रम संहिताएं: खरगे
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को दावा किया कि सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताएं आजादी के बाद से श्रमिकों के अधिकारों के लिए सबसे बड़ा झटका हैं और मोदी सरकार ने हालिया विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद ‘कायरतापूर्ण अंदाज’ में इनके नियमों को अधिसूचित किया।
उन्होंने कांग्रेस के इस वादे को दोहराया कि केंद्र में पार्टी की सरकार बनने पर इन श्रम संहिताओं की समीक्षा की जाएगी
खरगे ने एक बयान में कहा, ‘अपने चिर परिचित कायरतापूर्ण अंदाज में मोदी सरकार ने 8 और 9 मई 2026 को चार श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं को अधिसूचित किया और इससे पहले विधानसभा चुनावों के समाप्त होने का इंतजार किया। भारत के करोड़ों श्रमिकों के लिए ये संहिताएं काम पर रखने और नौकरी से निकालने की नीतियों, अनुबंध पर रोजगार और यूनियन की गतिविधि के लिए सीमित संभावना प्रदान करती हैं।’
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिना किसी परामर्श के इन श्रमिक-विरोधी संहिताओं का मसौदा तैयार किया और लागू किया।
खरगे ने कहा, ‘सरकार ने 2015 के बाद से भारतीय श्रम सम्मेलन भी नहीं बुलाया है। ये संहिताएं केवल प्रधानमंत्री के उद्योगपति मित्रों को लाभ पहुंचाने वाली हैं तथा आजादी के बाद से श्रमिकों के अधिकारों के लिए सबसे बड़ा झटका हैं।’
उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस भारत के श्रमिकों के लिए अपने दृष्टिकोण को लेकर दृढ़ है। हम अपने पांच सूत्री श्रमिक न्याय एजेंडे के लिए प्रतिबद्ध हैं।’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की यह प्रतिबद्धता है कि मनरेगा की बहाली और शहरी क्षेत्रों तक इसका विस्तार होना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष का यह भी कहना है, ‘राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन हो, जिसमें मनरेगा भी शामिल है। 25 लाख रुपये कवरेज का सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने वाला स्वास्थ्य का अधिकार कानून हो और जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा सहित सभी असंगठित श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा हो।’
खरगे ने कहा, ‘‘मुख्य सरकारी कार्यों में रोजगार का संविदाकरण रुकना चाहिए और मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों को कमजोर करने की समीक्षा होनी चाहिए।’’
भाषा हक वैभव
वैभव

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