समाचार संगठन अदालती कार्यवाही संबंधी ऑडियो-वीडियो का इस्तेमाल रिपोर्टिंग के लिए कर सकेंगे: न्यायालय

समाचार संगठन अदालती कार्यवाही संबंधी ऑडियो-वीडियो का इस्तेमाल रिपोर्टिंग के लिए कर सकेंगे: न्यायालय

समाचार संगठन अदालती कार्यवाही संबंधी ऑडियो-वीडियो का इस्तेमाल रिपोर्टिंग के लिए कर सकेंगे: न्यायालय
Modified Date: August 5, 2026 / 03:22 pm IST
Published Date: August 5, 2026 3:22 pm IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने साफ किया है कि अदालती कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो क्लिप को साझा करने और अपलोड करने पर रोक लगाने वाला उसका हालिया अंतरिम आदेश, समाचार संगठनों को न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग से प्रतिबंधित नहीं करता है।

शीर्ष अदालत का स्पष्टीकरण उस वक्त आया जब उसने इस बात का संज्ञान लिया कि उसके 24 जुलाई के अंतरिम आदेश को लेकर ‘कुछ भ्रम बना हुआ है।’

अंतरिम आदेश में अदालत प्रशासन की पूर्व अनुमति के बिना सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अदालती कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को पोस्ट/अपलोड करने पर रोक लगाई गई थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह प्रतिबंध सिर्फ समाचार रिपोर्ट में न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल तक ही सीमित है और इसे मीडिया संगठनों की रिपोर्टिंग पर पूरी तरह से लगी रोक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, ऐसा लगता है कि पहले के आदेश के पैराग्राफ 11 को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति है, जिसे यह न्यायालय साफ़ करना ज़रूरी समझता है। उस पैराग्राफ से यह साफ़ होता है कि इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि मान्यता प्राप्त समाचार संगठनों की अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर पूरी तरह रोक लगाई जा रही है।’’

न्यायालय ने कहा कि इसलिए, ऐसे समाचार संगठन अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं और आम जनता को कानूनी घटनाक्रमों एवं अदालती फैसलों के बारे में जानकारी दे सकते हैं, बस शर्त यह है कि ऐसी रिपोर्टिंग के दौरान अदालती कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो क्लिप का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

पीठ ने 31 जुलाई को दिए अपने नये आदेश में कहा, ‘‘कुल मिलाकर, समाचार संगठन अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग तो कर सकते हैं, लेकिन उन्हें 24 जुलाई को जारी आदेश के पैराग्राफ 10 में बताई गई पाबंदियों का पालन करना होगा।’’

पीठ ने 24 जुलाई के आदेश में कहा था, ‘‘अंतरिम उपाय के तौर पर यह निर्देश दिया जाता है कि इस न्यायालय के महापंजीयक या संबंधित उच्च न्यायालयों के महापंजीयकों की पूर्व अनुमति के बिना, न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल मंच पर डालना, उसमें बदलाव करना, उसे प्रकाशित/प्रसारित करना, उससे पैसे कमाना, पोस्ट करना, री-पोस्ट करना और अपलोड करना वर्जित रहेगा।’’

शीर्ष अदालत ने पत्रकार हर्षिता ग्रोवर की याचिका पर केंद्र और अन्य लोगों (जिनमें कुछ सोशल मीडिया मंच भी शामिल हैं) को नोटिस जारी करके उनसे जवाब मांगा था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश


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