निकोबार परियोजना की मंजूरियों की समीक्षा करने वाली समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करे एनजीटी : रमेश

निकोबार परियोजना की मंजूरियों की समीक्षा करने वाली समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करे एनजीटी : रमेश

निकोबार परियोजना की मंजूरियों की समीक्षा करने वाली समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करे एनजीटी : रमेश
Modified Date: August 9, 2026 / 11:53 am IST
Published Date: August 9, 2026 11:53 am IST

नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से उच्चाधिकार प्राप्त उस समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का रविवार को आग्रह किया, जिसे उसने ‘‘पर्यावरण की दृष्टि से विनाशकारी’’ ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को दी गई पर्यावरण संबंधी मंजूरियों की समीक्षा के लिए गठित करने का निर्देश दिया था।

रमेश ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि इसमें गंभीर खामियां हैं।

रमेश ने उम्मीद जताई कि विभिन्न न्यायाधिकरण और विशेष रूप से एनजीटी अपनी आवाज एवं प्राधिकार फिर से हासिल करेंगे और अपने कानूनी दायित्वों का अक्षरशः पालन करेंगे।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘लोकसभा में कल न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 पर चर्चा होने वाली है। यह विधेयक वर्षों के दौरान गठित 16 अर्द्ध-न्यायिक अधिकरणों के लिए नयी दिशा तय कर सकता है। इनमें अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) भी शामिल है जिसका गठन अक्टूबर 2010 में संसद के एक कानून के तहत हुआ था।’’

रमेश ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य 19 नवंबर 2025 के ऐतिहासिक ‘मद्रास बार एसोसिएशन’ फैसले में दिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को लागू करना है। इस फैसले में न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 के प्रमुख प्रावधानों को रद्द कर दिया गया था और नियुक्तियों के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग गठित करने को कहा गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि एक स्वतंत्र एनजीटी का अस्तित्व ही दांव पर था इसलिए मैं भी उच्चतम न्यायालय में 2021 के कानून को चुनौती देने वालों में शामिल था। इससे पहले मैंने वित्त अधिनियम, 2017 के उन प्रावधानों को भी चुनौती दी थी जिनके जरिए न्यायाधिकरणों को कमजोर करने की कोशिश की गई थी।’’

रमेश ने कहा कि इनमें संशोधनों को धन विधेयक का हिस्सा घोषित करने का रास्ता अपनाया गया था, ताकि संसद के दोनों सदनों, विशेष रूप से राज्यसभा में इनकी पूरी और उचित विधायी समीक्षा से बचा जा सके।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा तर्कसंगत आलोचना और अदालत के पूर्व फैसलों पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण काफी नुकसान हो चुका है।

उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि एनजीटी मुख्य निशाना था क्योंकि मोदी सरकार को उसका कामकाज असुविधाजनक लग रहा था।

रमेश ने कहा कि सरकार ने 2021 के कानून का उच्चतम न्यायालय तक पूरी दृढ़ता से बचाव किया, लेकिन अब उसे उन्हीं कई सुधारों को लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिनका उसने पुरजोर विरोध किया था और जिनकी बेहद जरूरत थी।

उन्होंने कहा कि आखिरकार टकराव की जगह सहमति ने ले ली है।

रमेश ने कहा, ‘‘उम्मीद है कि विभिन्न न्यायाधिकरण और विशेष रूप से एनजीटी अपनी आवाज एवं प्राधिकार फिर से हासिल करेंगे तथा अपने कानूनी दायित्वों को अक्षरशः पूरा करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि इस बदलाव का संकेत देने के लिए एनजीटी को उस उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए, जिसे उसने पर्यावरण की दृष्टि से विनाशकारी ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना की पर्यावरण संबंधी मंजूरियों की समीक्षा के लिए गठित करने का निर्देश दिया था और जिसके आधार पर उसे परियोजना को मंजूरी देने के लिए विवश होना पड़ा।

रमेश ने कहा कि समिति की रिपोर्ट आठ जुलाई 2025 को एनजीटी के समक्ष ‘‘सीलबंद लिफाफे’’ में पेश की गई थी।

उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों के चयन के लिए एक आयोग गठित करने संबंधी विधेयक इस सप्ताह लोकसभा में पेश किया जाना है।

न्यायाधिकरण सुधार विधेयक के अनुसार, इसका प्रमुख उद्देश्य विभिन्न अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता तथा नियुक्ति की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ उनकी स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करना है।

अगले सप्ताह लोकसभा में पेश किए जाने वाले इस विधेयक में राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन की रूपरेखा भी दी गई है।

भाषा

सिम्मी रंजन

रंजन

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