प. बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के ‘घेराव’ मामले की जांच एनआईए दो महीने के भीतर पूरी करे : न्यायालय

प. बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के ‘घेराव’ मामले की जांच एनआईए दो महीने के भीतर पूरी करे : न्यायालय

प. बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के ‘घेराव’ मामले की जांच एनआईए दो महीने के भीतर पूरी करे : न्यायालय
Modified Date: May 11, 2026 / 05:20 pm IST
Published Date: May 11, 2026 5:20 pm IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एक अप्रैल को हुई हिंसा की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया। इस हिंसा में एक भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि एनआईए को जांच पूरी करने के बाद सक्षम क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय के समक्ष अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए।

पीठ ने पूछा, “जांच की क्या स्थिति है? क्या यह पूरी हो चुकी है?”

एनआईए की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि वह विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेंगे।

पीठ ने कहा, “हमारा मानना ​​है कि एनआईए को जल्द से जल्द जांच पूरी करने दें, संभव हो तो दो महीने के भीतर…।”

पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘आप अपना आरोप-पत्र दाखिल करें। कानून अपना काम करेगा।’’

न्यायालय ने 24 अप्रैल को एनआईए को मामले की जांच पूरी होने पर आरोप-पत्र दाखिल करने की अनुमति दी थी।

मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की 60 लाख से अधिक आपत्तियों से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में तैनात किया गया था।

शीर्ष अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के उस पत्र का स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें एक अप्रैल की रात की भयावह घटनाओं का विस्तृत वर्णन किया गया था, जब तीन महिलाओं सहित सात न्यायिक अधिकारियों और एक पांच वर्षीय बच्चे को भीड़ ने नौ घंटे से अधिक समय तक बिना भोजन-पानी के बंधक बनाकर रखा था।

बाद में, उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर निर्वाचन आयोग की शिकायत के आधार पर एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश


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