Ayodhya Pawan Pandey Case 2015 : राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच फिर सुर्खियों में सपा नेता पवन पांडेय, सामने आया 11 साल पहले का सनसनीखेज़ मामला, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच सपा नेता तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय का 2015 का एक पुराना मामला फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के साथ नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

Ayodhya Pawan Pandey Case 2015 : राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच फिर सुर्खियों में सपा नेता पवन पांडेय, सामने आया 11 साल पहले का सनसनीखेज़ मामला, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप

Ayodhya Pawan Pandey Case 2015 / Image Source : AI

Modified Date: July 16, 2026 / 09:34 pm IST
Published Date: July 16, 2026 9:24 pm IST

अयोध्या : Ayodhya Pawan Pandey Case 2015 :  राम मंदिर में कथित दान चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इस पूरे प्रकरण में अयोध्या के स्थानीय सपा नेता तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। इसी बीच उनके मंत्री रहते सामने आया एक पुराना मामला भी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। यह वही मामला है, जिसमें उन पर एक नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगे थे। उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और पवन पांडेय अखिलेश यादव सरकार में राज्यमंत्री थे। आरोप लगने के बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार मामला अदालत पहुंचा, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2015 का है। उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। पवन पांडेय को अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में गिना जाता था और वह राज्यमंत्री थे। अयोध्या निवासी मोहम्मद इस्लाम ने आरोप लगाया था कि 14 अगस्त 2015 को उनकी नाबालिग बेटी को कुछ लोगों ने बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया।पीड़ित पिता का आरोप था कि मंत्री होने के कारण पवन पांडेय का इतना रसूख था कि पुलिस ने न तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की और न ही मामले में नामजद अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनका कहना था कि घटना के दो साल बाद भी पुलिस उनकी बेटी को बरामद नहीं कर सकी।

पीड़ित ने क्या लगाए थे आरोप?

पीड़ित पिता के मुताबिक, बेटी के अपहरण के कुछ समय बाद उनके पास एक फोन आया, जिसमें उन्हें अयोध्या के अंगूरीबाग स्थित पवन पांडेय के आवास पर बुलाया गया। उनका आरोप था कि जब वह वहां पहुंचे तो अपहरण में शामिल लोग वहीं मौजूद थे। पीड़ित का दावा था कि पवन पांडेय ने उनसे कहा कि उनकी बेटी उनके कब्जे में है और अब उसे भूल जाना चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पवन पांडेय ने उनसे कहा कि वह और उनके लोग लड़की का शारीरिक शोषण कर रहे हैं और उन्हें वह लड़की पसंद है।

पीड़ित के अनुसार, पवन पांडेय ने उनकी बेटी के बदले 4 से 5 लाख रुपये देने की पेशकश भी की। जब उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया तो उनके साथ मारपीट की गई। पीड़ित पिता का आरोप था कि इस दौरान पवन पांडेय ने उनसे कहा कि उनके कई बच्चे हैं, इसलिए उन्हें अपनी बेटी को भूल जाना चाहिए। क्योंकि उनकी बेटी अब उनके कब्जे में है, उसे उनके लोग इस्तेमाल कर रहे हैं और वह उन्हें पसंद है।

दो साल तक नहीं हुई कार्रवाई, फिर कोर्ट पहुंचे पीड़ित

Ayodhya Pawan Pandey Case 2015 FIR Status पीड़ित का आरोप था कि मंत्री के प्रभाव के कारण पुलिस ने दो साल तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। न तो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और न ही उनकी बेटी बरामद की गई। पुलिस से न्याय की उम्मीद टूटने के बाद उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया।मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय समेत अन्य नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व मंत्री और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

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लेखक के बारे में

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