उत्तराखंड में हिमनद झीलों से उत्पन्न संभावित आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए नौ करोड़ रुपये मंजूर
उत्तराखंड में हिमनद झीलों से उत्पन्न संभावित आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए नौ करोड़ रुपये मंजूर
देहरादून, 25 मार्च (भाषा) उत्तराखंड में राष्ट्रीय हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ जोखिम शमन कार्यक्रम (एनजीआरएमपी) के क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को नौ करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की।
यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने हिमालयी पारिस्थितिकी की संवेदनशीलता के दृष्टिगत राज्य में हिमनद झीलों से उत्पन्न संभावित आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित उपायों को अपनाने के निर्देश दिए हैं।
कार्यक्रम के तहत, राज्य की 13 संवेदनशील हिमनद झीलों की निगरानी, जोखिम आकलन एवं न्यूनीकरण हेतु एक कार्यसमूह का गठन किया गया है। इस कार्यसमूह का नोडल संस्थान वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (डब्लूआईएचजी) को नामित किया गया है।
कार्यसमूह में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआईएच), उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान, तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेंक्षण (जीएसआई) के विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ भू-वैज्ञानिकों को सम्मिलित किया गया है।
कार्यसमूह द्वारा परियोजना के अंतर्गत आधुनिक निगरानी प्रणाली के विकास, पूर्व चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) की स्थापना, अनुसंधान एवं तकनीकी अध्ययन तथा जोखिम न्यूनीकरण उपायों के समन्वित क्रियान्वयन का कार्य किया जाएगा।
परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित कुल नौ करोड़ की धनराशि में से 7.80 करोड़ रुपये वाडिया संस्थान को उपकरणों की खरीद, उपग्रह मानचित्रण, सॉफ्टवेयर एवं संचार सुविधाओं के विकास, फील्ड ऑपरेशन तथा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, वाडिया को 1.20 करोड़ रुपये उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से जमीनी सर्वेक्षण, जन-जागरूकता एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए दिए जाएंगे।
यह परियोजना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य हिमनद झीलों से उत्पन्न संभावित आपदाओं के जोखिम को न्यूनतम करना तथा समयबद्ध चेतावनी तंत्र विकसित करना है।
भाषा दीप्ति
धीरज
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