बेंगलुरु, 16 अगस्त (भाषा) बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) के विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों ने विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के शामिल होने का विरोध किया है।
विद्यार्थियों एवं पूर्व छात्रों ने 15 अगस्त को जारी एक बयान में हैदराबाद स्थित नालसार विधि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण रोकने संबंधी बीसीआई के आदेश की निंदा की। हालांकि, यह आदेश अब वापस लिया जा चुका है। उन्होंने नालसार के विद्यार्थियों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि इन विद्यार्थियों ने सत्ता के सामने सच बोलकर अनुकरणीय साहस एवं नैतिक दृढ़ता दिखाई है।
इस बयान पर इस साल डिग्री प्राप्त कर रहे 165 विद्यार्थियों, 409 मौजूदा विद्यार्थियों और 128 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए।
बयान में कहा गया, ‘‘हमें मालूम है कि बीसीआई ने नालसार के खिलाफ सभी कार्यवाही बंद कर दी हैं लेकिन इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि एक वैधानिक संस्था ने सार्वजनिक विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों के खिलाफ असंवैधानिक एवं गैरकानूनी कार्यवाही शुरू की थी। कार्यवाही वापस लेने से न तो उसके प्रभाव कम हो जाते हैं और न ही बीसीआई एवं उसके अध्यक्ष की जिम्मेदारी कम होती है।’’
उन्होंने दावा किया कि विद्यार्थियों के पंजीकरण पर रोक और जांच संबंधी आदेश वापस लेने के बाद बीसीआई ने भी अपनी कार्रवाई की ‘‘मनमानी’’ तथा ‘‘गैरकानूनी प्रकृति’’ को स्वीकार किया है।
बयान में कहा गया कि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह हर विद्यार्थी के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण अवसर होता है जिसमें उसकी वर्षों की मेहनत और दृढ़ता का सम्मान किया जाता है।
बयान में कहा गया, ‘‘ऐसे में ऊंचे पदों पर बैठे उन लोगों को विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करने के लिए बुलाना आपत्तिजनक और अपमानजनक है जिन्होंने विद्यार्थियों के प्रति सार्वजनिक रूप से तिरस्कार और उपेक्षा का भाव दिखाया है। यह विद्यार्थियों और उनके संघर्षों का मजाक उड़ाने जैसा है।’’
बयान में मांग की गई कि बीसीआई नालसार के विद्यार्थियों और शिक्षकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने की कोशिश के लिए उनसे बिना शर्त माफी मांगे।
इसमें कहा गया, ‘‘हम मनन कुमार मिश्रा द्वारा अपने आचरण की जिम्मेदारी लिए बिना एनएलएसआईयू के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर कड़ी आपत्ति जताते हैं। हम नालसार के विद्यार्थियों की उस मांग के साथ भी एकजुटता व्यक्त करते हैं, जिसमें उन्होंने अपने दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में भारत के प्रधान न्यायाधीश को आमंत्रित करने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इन्हीं कारणों से हम प्रधान न्यायाधीश के एनएलएसआईयू के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पर भी कड़ी आपत्ति जताते हैं।’’
न्यायालय ने शुक्रवार को बार बीसीआई के उस आदेश पर कड़ा रुख अपनाया था जिसमें सभी राज्य बार काउंसिल को निर्देश दिया गया था कि वे नालसार विश्वविद्यालय के 2026 बैच के किसी भी स्नातक को अधिवक्ता के तौर पर पंजीकृत नहीं करें।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के हैदराबाद स्थित संस्थान के प्रस्तावित दौरे पर छात्रों के प्रदर्शन के मामले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि छात्रों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है और प्रधान न्यायाधीश ने कहा था, ‘‘यह छात्रों और मेरे बीच की बात है।’’
भाषा सिम्मी रंजन
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