तिरुवनंतपुरम, 18 अगस्त (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मंगलवार को विड़िण्गम से दो कंटेनर को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही वहां के अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह से आयात-निर्यात (एक्जिम) की शुरुआत हो गई।
सतीशन ने राज्य के उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी एवं वाणिज्य मंत्री पीके कुन्हालीकुट्टी और कांग्रेस विधायक एम विंसेंट के साथ मिलकर ‘मिशन समुद्र’ की भी शुरुआत की, जो बंदरगाह-आधारित औद्योगिक और आपूर्ति शृंखला विकास योजना है।
सतीशन ने कहा कि एक्जिम परिचालन की शुरुआत केरल की विकास यात्रा में एक अहम पल है, क्योंकि अब यहां से दुनिया के किसी भी बंदरगाह पर सामान भेजा जा सकता है और जल्द ही वस्तुओं का आयात भी शुरू हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि विड़िण्गम ‘ऑटोमेटेड एल्गॉरिद्म’ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर आधारित प्रणालियों से लैस भारत का पहला बंदरगाह है।
सतीशन ने कहा कि अगर पिछले 10 वर्षों में रेल और सड़क संपर्क का काम पूरा हो गया होता, तो राज्य को जो फ़ायदा होता वह अभी होने वाले फ़ायदे से 100 गुना ज़्यादा होता।
उन्होंने कहा कि संपर्क सुविधाओं में देरी जरूर हुई है, लेकिन अब भी बहुत देर नहीं हुई है और मौजूदा सरकार इसे दूर करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सत्ता में आने के बाद इस सरकार के शुरुआती फैसलों में 15,000 करोड़ रुपये की रिंग रोड परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के वास्ते 3,200 करोड़ रुपये देना शामिल था। अगर हमने यह काम पहले कर लिया होता, तो इसकी लागत केवल 1,600 करोड़ रुपये आती।’’
उन्होंने कहा, ‘‘रियायत समझौते में शामिल सरकार की जो भी जिम्मेदारियां पिछले 10 वर्षों में पूरी नहीं हो पाईं, उन्हें तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाएगा।’’
सतीशन ने कहा कि सरकार का मकसद बंदरगाह से जुड़े लॉजिस्टिक पार्क, माल भंडारण केंद्र, कंटेनर प्रतीक्षा केंद्र, मुक्त औद्योगिक क्षेत्र और मछली प्रसंस्करण क्षेत्र आदि बनाना है, जिसके लिए ‘इंफ्रास्ट्रक्चर केरल लिमिटेड’ (इंकेल) और केरल औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम (किंफ्रा) को तिरुवनंतपुरम में जरूरी जमीन हासिल करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि निर्यात-आयात परिचालन की शुरुआत के तहत रवाना किए गए दोनों कंटेनर में इडली, सांभर और केले के पकौड़े समेत विभिन्न खाद्य उत्पाद थे।
सतीशन ने कहा कि राज्य सरकार काजू और नारियल के रेशे (कॉयर) जैसे पारंपरिक उत्पादों का दुनिया के सभी हिस्सों में निर्यात करने की योजना पर भी काम कर रही है।
उन्होंने ‘मिशन समुद्र’ का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय समुद्री बंदरगाहों, एक कंटेनर केंद्र और 18 छोटे बंदरगाहों को आपस में जोड़कर केरल को एक बंदरगाह-शहर में बदलना है।
भाषा पारुल सुरेश
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