मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत पर शीर्ष अदालत में कोई जानकारी नहीं

मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत पर शीर्ष अदालत में कोई जानकारी नहीं

मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ शिकायत पर शीर्ष अदालत में कोई जानकारी नहीं
Modified Date: January 14, 2026 / 04:20 pm IST
Published Date: January 14, 2026 4:20 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय प्रशासन ने दिल्ली उच्च न्यायालय को अवगत कराया कि उसे मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ न तो भ्रष्टाचार या अनुचित आचरण के आरोपों से संबंधित कोई शिकायत की जानकारी है, न ही उसे या भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को ऐसी कोई शिकायत प्राप्त हुई है।

शीर्ष अदालत प्रशासन की ओर से यह बयान न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव के समक्ष दिया गया, जो सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत वांछित जानकारी उपलब्ध नहीं कराये जाने के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई कर रहे थे।

न्यायमूर्ति कौरव ने शीर्ष अदालत के प्रशासन की ओर से पेश वकील से केवल यह पूछा कि क्या उन्हें पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ कोई शिकायत मिली है या नहीं।

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वकील ने जवाब दिया, ‘‘हमारा जवाब यह है कि जिस प्रारूप में जानकारी मांगी गई है, उसमें जानकारी नहीं रखी जाती है। हम इस जानकारी को उच्चतम न्यायालय की पंजी में नहीं रखते हैं।’’’

अदालत ने पाया कि ‘कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला’ है, लिहाज़ा पक्षों को अपने लिखित उत्तर दाखिल करने के लिए कहा गया और मामले की सुनवाई एक अप्रैल को सूचीबद्ध कर दी गई।

उच्चतम न्यायालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) के समक्ष सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दायर कर याचिकाकर्ता सौरभ दास द्वारा यह सूचना मांगी थी कि ‘क्या भारत के प्रधान न्यायाधीश, कॉलेजियम और/या उच्चतम न्यायालय को (मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी.) राजा के कार्यकाल के दौरान किसी भी समय भ्रष्टाचार और/या किसी अनुचित आचरण के आरोप से संबंधित पत्र, अभ्यावेदन या अन्य माध्यमों से कोई शिकायत प्राप्त हुई है।’

अपनी आरटीआई आवेदन में दास ने इस तरह की शिकायतों की कुल संख्या के साथ-साथ उनपर की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी थी।

उनकी याचिका में बताया गया कि सीपीआईओ के जवाब में कहा गया है कि ‘‘जानकारी उस तरीके से नहीं रखी जाती है, जैसी मांगी गई है’’।

याचिका में यह तर्क दिया गया है कि सूचना देने से इनकार करना त्रुटिपूर्ण था, क्योंकि आरटीआई आवेदन में केवल ‘हां या ना’ का प्रश्न पूछा गया था, जिसके लिए किसी विशेष प्रारूप में ऐसी जानकारी के प्रकटीकरण या रखरखाव की आवश्यकता नहीं थी।

भाषा नोमान सुरेश

सुरेश


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