स्पष्ट साक्ष्य के बिना किसी व्यक्ति पर क्रूरता के अपराध का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: न्यायालय |

स्पष्ट साक्ष्य के बिना किसी व्यक्ति पर क्रूरता के अपराध का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: न्यायालय

स्पष्ट साक्ष्य के बिना किसी व्यक्ति पर क्रूरता के अपराध का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: न्यायालय

:   December 6, 2023 / 11:13 PM IST

नयी दिल्ली, छह दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि किसी विवाहित महिला से क्रूरता के मामले में हस्तक्षेप और संलिप्तता के स्पष्ट साक्ष्य के बिना केवल एक घटना का विवरण किसी पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है।

शीर्ष अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए और 506 और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत कथित अपराध करने के आरोपी एक व्यक्ति की बहन और चचेरे भाई-बहनों सहित चार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

आईपीसी की धारा 498ए पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा किसी महिला के साथ क्रूरता करने के अपराध से संबंधित है, वहीं धारा 506 आपराधिक धमकी के लिए सजा से संबंधित है।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी की पीठ ने मामले में दाखिल आरोपपत्र का अवलोकन करते हुए कहा कि अपीलकर्ताओं के खिलाफ किए गए दावे ‘‘बहुत अस्पष्ट और हल्के’’ थे।

पीठ ने 30 नवंबर के आदेश में कहा, ‘‘शिकायतकर्ता के वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप के किसी भी भौतिक सबूत के एक भी विवरण के बिना, जब तक कि यह स्पष्ट न हो, उस व्यक्ति को आईपीसी की धारा 498ए के तहत क्रूरता करने के संबंध में दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है।’’

पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता मायके में नहीं रह रहे थे और उनमें से एक भारत में भी नहीं रह रहा था। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के मार्च 2019 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसने चारों के खिलाफ आरोपपत्र को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

पीठ ने उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता की शादी जून 2015 में हुई थी और उसने एक शिकायत की थी जिसके बाद नवंबर 2016 में कर्नाटक में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

शिकायत पर गौर करते हुए पीठ ने कहा कि महिला ने आरोप लगाया था कि फरवरी 2016 में अपीलकर्ताओं में से एक ने कथित तौर पर उसकी कद-काठी को लेकर टिप्पणी की थी और बाद में उसके निजी सामान को कूड़ेदान में फेंक दिया था।

पीठ ने कहा कि आरोपपत्र में एकमात्र आरोप जो प्रमाणित पाया गया वह यह था कि अपीलकर्ताओं में से एक ने महिला की कुछ निजी वस्तुओं को जमीन पर फेंक दिया था क्योंकि उन्हें उचित स्थान पर नहीं रखा गया था।

पीठ ने कहा कि अन्य तीन अपीलकर्ताओं के संबंध में आरोप पत्र में आरोप लगाया गया है कि वे पंचायत में मौजूद थे जो पक्षों के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए बुलाई गई थी।

भाषा आशीष धीरज

धीरज

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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