कॉजपा प्रदर्शन को लेकर कोई याचिका दायर नहीं की गई, मीडिया की खबरें ‘गैर-जिम्मेदाराना’: सीजेआई

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कॉजपा प्रदर्शन को लेकर कोई याचिका दायर नहीं की गई, मीडिया की खबरें ‘गैर-जिम्मेदाराना’: सीजेआई

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  • Publish Date - July 24, 2026 / 01:55 PM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 01:55 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने मीडिया में आई उन खबरों को शुक्रवार को ‘‘गैर-जिम्मेदाराना’’ करार दिया, जिनमें कहा गया है कि उन्होंने 20 जुलाई को छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि कोई याचिका दायर नहीं की गई थी, बल्कि केवल एक अभ्यावेदन दिया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दो दिन में यह सरासर झूठा दावा किया गया कि एक याचिका दायर की गई थी और मीडिया अपनी सभी जिम्मेदारियों से बेपरवाह होकर यह गलत खबर प्रसारित कर रहा है कि प्रधान न्यायाधीश ने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आज सुबह 10 बजे तक (इस संबंध में) कोई याचिका नहीं दायर की गई। केवल एक अभ्यावेदन था…जिसे मिश्रा (नाम के व्यक्ति) या किसी अन्य व्यक्ति ने भेजा था। मैं किसी अभ्यावेदन को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं? लेकिन लोग इस बारे में गैर-जिम्मेदाराना ढंग से खबरें प्रसारित कर रहे हैं।’’

उन्होंने यह टिप्पणी शुक्रवार को उस वक्त की, जब वकील अपने मामलों की तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख कर रहे थे।

बुधवार को एक वकील ने 20 जुलाई को यहां कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।

वकील ने कहा था, ‘‘पुलिस की कथित बर्बरता के वीडियो मेरे पास हैं। क्या इसे कल (बृहस्पतिवार) के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है… छात्र वहां (प्रदर्शन कर रहे) हैं।’’

उन्होंने दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ पुलिस ने बर्बरता की।

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध स्वीकार नहीं किया था और स्पष्ट किया कि पीठ केवल मामले के उल्लेख के चरण में वीडियो फुटेज देखने को इच्छुक नहीं है।

उन्होंने कहा था, ‘‘हमें वीडियो में कोई रुचि नहीं है। हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है… हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।’’

वकील ने जब दोबारा कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया है और वीडियो साक्ष्य का उल्लेख किया, तो प्रधान न्यायाधीश ने कहा था, ‘‘हमारा समय बर्बाद मत कीजिए। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।’’

कॉजपा के नेतृत्व में 20 जुलाई को निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।

प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

भाषा सुभाष सिम्मी

सिम्मी