देश में एंटी-रेबीज टीके और रेबीज इम्यूनोग्लोबिन की कोई कमी नहीं: नड्डा

देश में एंटी-रेबीज टीके और रेबीज इम्यूनोग्लोबिन की कोई कमी नहीं: नड्डा

देश में एंटी-रेबीज टीके और रेबीज इम्यूनोग्लोबिन की कोई कमी नहीं: नड्डा
Modified Date: March 24, 2026 / 03:25 pm IST
Published Date: March 24, 2026 3:25 pm IST

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को कहा कि देश में रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (आरआईजी) और एंटी-रेबीज टीके (एआरवी) की कोई कमी नहीं है और इनकी आपूर्ति घरेलू मांग से कहीं अधिक है।

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के जवाब में नड्डा ने कहा कि आरआईजी और एआरवी की पर्याप्त उपलब्धता है तथा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वास्तविक समय निगरानी प्रणाली भी मौजूद है।

उन्होंने कहा, “देश में एआरवी और आरआईजी की कोई कमी नहीं है। हमें इस सोच को छोड़ देना चाहिए कि कमी है। इनका निर्यात रोकने की भी कोई आवश्यकता नहीं है।’’

मंत्री ने कहा कि रेबीज वायरस मुख्य रूप से जानवरों के काटने से फैलता है और घातक होता है।

नड्डा के अनुसार, भारत में एआरवी के उत्पादन की वार्षिक क्षमता लगभग 8.17 करोड़ वायल और आरआईजी की 1.77 करोड़ वायल है। उन्होंने बताया कि देश में प्रतिवर्ष पशुओं के काटने के कुल मामले लगभग 58 लाख हैं, जिनमें से 47 लाख कुत्तों के काटने के मामले होते हैं।

उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर हम कह सकते हैं कि आरआईजी और एआरवी की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है और देश के पास निर्यात के लिए अतिरिक्त भंडार भी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और राज्यों के भीतर आरआईजी और एआरवी के वितरण की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।

एक लिखित जवाब में उन्होंने कहा कि एआरवी और आरआईजी के उत्पादन का वर्षवार समेकित आंकड़ा केंद्र स्तर पर नहीं रखा जाता, क्योंकि इनका निर्माण कई निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों द्वारा किया जाता है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (एनआरसीपी) के तहत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय मुफ्त औषधि पहल (एनएफडीआई) के तहत आरआईजी और एआरवी की खरीद के लिए धन आवंटित किया जाता है और इसकी खरीद विकेंद्रीकृत है।

नड्डा ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समय-समय पर परामर्श जारी किए जाते हैं ताकि एनएफडीआई के तहत आवंटित धन से एआरवी और आरआईजी की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र सरकार उन्हें तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024-25 में आरआईजी और एआरवी का निर्यात क्रमशः 64,131 किलोग्राम और 2,81,139 किलोग्राम रहा।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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